वो आईना: एक पुरानी डरावनी कहानी
प्रोफेसर अरुण वर्मा पुरातत्वविद् थे, जिन्हें एक खंडहर मंदिर में खुदाई के दौरान एक असामान्य आईना मिला। यह आईना तांबे और चांदी से जड़ा हुआ था, उसकी सतह पर प्राचीन संस्कृत में लिखा था: “जो देखेगा, वह भुगतेगा।” प्रोफेसर ने उसे अपने घर ले आए, अपनी संग्रहालय की तरह दिखने वाली स्टडी में रख दिया।
भाग 2: पहली झलक
एक अंधेरी रात, जब तेज बारिश हो रही थी, प्रोफेसर ने देखा कि आईने में उनकी परछाई नहीं दिख रही थी। इसके बजाय, उसमें एक प्राचीन युद्ध का दृश्य दिखाई दे रहा था। एक राजा अपने ही भाई को मार रहा था। आवाजें सुनाई दे रही थीं, चीखें… प्रोफेसर घबराकर पीछे हटे, लेकिन आकर्षित भी थे।
भाग 3: गहराता रहस्य
अगले कुछ दिनों में, आईना अलग-अलग ऐतिहासिक घटनाएँ दिखाने लगा:
हर दृश्य इतना स्पष्ट था मानो वहीं घटित हो रहा हो। प्रोफेसर ने देखा कि हर दृश्य में एक ही व्यक्ति दिखाई देता था – एक अंधे साधु जो आईने की ओर देखकर मुस्कुरा रहा था, मानो वह प्रोफेसर को देख सकता हो।
भाग 4: अतीत का साया
एक रात, आईने ने प्रोफेसर के अपने अतीत का दृश्य दिखाया। वह दृश्य था जब उन्होंने अपने छोटे भाई को बचपन में एक दुर्घटना में मरते हुए देखा था। प्रोफेसर चीख पड़े। उस रात के बाद, आईना केवल उनके अपने दर्दनाक अतीत के दृश्य दिखाने लगा।
भाग 5: हावी होता श्राप
धीरे-धीरे, आईना सिर्फ दृश्य दिखाने से आगे बढ़ने लगा। घर में अजीब आवाजें आने लगीं। प्रोफेसर की परछाई अब कभी-कभी अपने आप चलने लगती। स्टडी में हमेशा सर्द हवा का एहसास रहता। उनकी पत्नी ने कहा कि रातों को उन्हें कोई स्टडी में बातें करते सुनाई देता है।
भाग 6: समाधान की खोज
प्रोफेसर ने शोध किया और पता लगाया कि यह आईना एक तांत्रिक ने बनाया था जो मानता था कि मनुष्य के सारे दुखों की जड़ अतीत में है। इस आईने को बनाने का उद्देश्य था लोगों को उनके अतीत में कैद करना।
भाग 7: अंतिम सामना
एक रात, प्रोफेसर ने देखा कि आईने में वह अंधा साधु बाहर आने की कोशिश कर रहा है। उसकी उंगलियां आईने की सतह से बाहर निकल रही थीं। प्रोफेसर समझ गए कि यह कोई साधारना आईना नहीं था – यह एक प्रेत को कैद करने का पात्र था जो अतीत के दुखों से पोषण पाता था।
प्रोफेसर ने आखिरी उपाय किया। प्राचीन ग्रंथों में पढ़े मंत्रों का उच्चारण करते हुए, उन्होंने आईने को कालीन में लपेटा और उसे तोड़ दिया।
भाग 8: परिणाम
आईना टूटने पर एक तेज चीख सुनाई दी। सारे टुकड़े काले होकर राख में बदल गए। लेकिन प्रोफेसर की आँखों में एक बदलाव आ गया था। अब जब भी वह किसी शीशे में देखते, उन्हें अतीत के दृश्य ही दिखाई देते। आईना टूट गया था, लेकिन उसका श्राप प्रोफेसर के भीतर जीवित रहा।
और कहते हैं, उस खंडहर मंदिर में आज भी रात के समय शीशे के टूटने की आवाज सुनाई देती है… मानो कोई और आईना वहाँ छिपा हो, अपनी बारी का इंतजार कर रहा हो।
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