विनय अपने नए घर की तीसरी मंजिल से उतर रहा था। पिछले हफ्ते ही वह इस इमारत में शिफ्ट हुआ था। आधी रात के करीब का समय था। लिफ्ट खराब होने की वजह से उसे सीढ़ियों से ही उतरना पड़ रहा था।
सीढ़ियों की रोशनी टिमटिमा रही थी। हर मोड़ पर एक बल्ब जरूर था, लेकिन वे सभी मद्धम पीली रोशनी बिखेर रहे थे, जैसे इस इमारत ने कभी तेज रोशनी देखी ही न हो। विनय ने अपनी घड़ी देखी – रात के 11:45 बजे थे। उसने दफ्तर में लेट होकर अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट पूरी की थी। पेट खाली था और सिर भारी।
जैसे ही वह दूसरी मंजिल पर पहुँचा, उसका फोन बज उठा। उसने फोन निकालकर देखा – अज्ञात नंबर। विनय ने सोचा, “इस वक्त कौन फोन कर रहा होगा?” उसने कॉल रिसीव की।
“हेलो?”
दूसरी तरफ से सन्नाटा था, सिर्फ एक हल्की सी सिसकारी आ रही थी, जैसे कोई धीरे से साँस ले रहा हो।
“हेलो? बोलो कौन है?” विनय ने फिर कहा।
“तुम… तुम वहाँ हो ना?” एक कर्कश, भयानक आवाज आई, जैसे किसी ने रेत खाई हो। आवाज इतनी डरावनी थी कि विनय के रोंगटे खड़े हो गए।
“कौन है आप? गलत नंबर मिल गया होगा,” विनय ने जल्दी से कहा।
“गलत नहीं… विनय… मैं तुम्हारे लिए ही आ रहा हूँ…” आवाज फटी हुई और डरावनी लग रही थी। विनय ने फोन काट दिया।
“कोई मजाक कर रहा है,” विनय ने खुद को समझाया। उसने सीढ़ियाँ उतरना जारी रखा। पर उसके कदम अब जल्दी-जल्दी पड़ रहे थे। जैसे ही वह ग्राउंड फ्लोर पर पहुँचा, फोन फिर बज उठा। वही अज्ञात नंबर।
विनय ने कॉल रिजेक्ट कर दी और फोन साइलेंट मोड पर डाल दिया। उसने इमारत के बाहर कदम रखा। रात गहरी थी, आसपास सन्नाटा छाया हुआ था। सड़क पर एक भी गाड़ी नहीं दिख रही थी। विनय ने अपनी कार की तरफ बढ़ना शुरू किया।
तभी उसका फोन वाइब्रेट हुआ। कोई मैसेज आया था। विनय ने फोन चेक किया। वही अज्ञात नंबर से एक मैसेज था: “मैंने देख लिया तुम्हें।”
विनय के पसीने छूट गए। उसने इधर-उधर देखा। सड़क खाली थी, सिर्फ दूर एक स्ट्रीट लाइट टिमटिमा रही थी। उसने जल्दी से कार अनलॉक की और अंदर बैठ गया। कार स्टार्ट करते हुए उसने रियर व्यू मिरर में देखा – कोई नहीं था।
विनय ने गाड़ी तेज रफ्तार में चलाई। उसे लगा जैसे कोई उसका पीछा कर रहा है। हर पल वह रियर व्यू मिरर में देखता, लेकिन पीछे कोई गाड़ी नहीं दिख रही थी।
अचानक, फोन फिर बज उठा। विनय ने देखा – वही नंबर। इस बार उसने कॉल रिसीव कर ली।
“तुम भाग नहीं सकते… मैं हर जगह हूँ…” वही भयानक आवाज।
“आप कौन हैं? मुझे परेशान मत करिए!” विनय चिल्लाया।
“मैं वो हूँ जिसे तुम भूल गए… जिस दिन तुमने रस्ते में पड़े आदमी की मदद नहीं की थी… वो मर गया… अब मैं तुम्हारे लिए आ रहा हूँ…”
विनय को एक साल पहले की बात याद आई। एक बार देर रात वह ऑफिस से लौट रहा था। रास्ते में उसे एक आदमी घायल दिखाई दिया था, लेकिन वह रुका नहीं था। उसे डर लगा था कि कहीं कोई ठगी न हो। अगले दिन अखबार में खबर आई थी कि एक आदमी की हिट एंड रन में मौत हो गई। विनय के मन में कई बार ख्याल आया था कि क्या वह उसकी जान बचा सकता था, लेकिन उसने इसे दबा दिया था।
“वो… वो मैं नहीं था… मैंने कुछ नहीं किया,” विनय की आवाज काँप रही थी।
“तुमने मदद नहीं की… अब तुम्हारी बारी है…”
फोन कट गया। विनय ने देखा कि वह अपने घर से काफी दूर निकल आया था। वह एक सुनसान सड़क पर था, जहाँ दोनों तरफ पेड़ों के घने झुरमुट थे। अचानक, कार का इंजन स्पुटर करने लगा और फिर बंद हो गया।
“नहीं! अब नहीं!” विनय ने इंजन दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन वह चल ही नहीं रहा था। उसने फोन निकाला – नेटवर्क नहीं आ रहा था। वह पूरी तरह कट चुका था।
बाहर अँधेरा घना हो रहा था। विनय ने कार से बाहर देखा। पेड़ों के पीछे कुछ हिलता दिखाई दिया। उसकी साँसें तेज हो गईं। उसने कार का दरवाजा बंद कर दिया और लॉक कर दिया।
तभी उसके फोन पर एक और मैसेज आया: “मैं यहाँ हूँ।”
विनय ने कार की खिड़की से बाहर देखा। दूर, पेड़ों के बीच, एक काली आकृति खड़ी थी। वह इंसान जैसी थी, लेकिन उसके हावभाव अजीब थे। वह आकृति धीरे-धीरे कार की तरफ बढ़ रही थी।
विनय की धड़कनें तेज हो गईं। उसने कार स्टार्ट करने की बार-बार कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वह आकृति अब सिर्फ पचास गज दूर थी। विनय ने देखा कि उसके पास कोई चेहरा नहीं था – सिर्फ एक धुंधली सी आकृति।
विनय ने कार से बाहर भागने का फैसला किया। वह दरवाजा खोलकर बाहर कूदा और जंगल की तरफ भागने लगा। पीछे से उसे एक भयानक चीख सुनाई दी। उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा, बस भागता रहा।
जंगल में अँधेरा और भी घना था। विनय के पैरों के नीचे सूखी पत्तियाँ चरमरा रही थीं। वह थककर एक पेड़ के पीछे छिप गया। उसकी साँसें फूल रही थीं। उसने चारों तरफ देखा – कुछ नहीं दिख रहा था।
तभी उसके फोन ने वाइब्रेट किया। मैसेज था: “तुम मुझसे छिप नहीं सकते।”
विनय ने फोन जेब में डाला और फिर से भागने लगा। अचानक, उसके सामने एक खाई आ गई। वह रुक गया। खाई काफी गहरी थी। उसने मुड़कर देखना चाहा, लेकिन तभी पीछे से एक ठंडी साँस उसकी गर्दन को छू गई।
विनय चिल्लाया और आगे की तरफ कूद गया। उसने खुद को हवा में तैरता हुआ महसूस किया, और फिर अँधेरे में गिरता चला गया।
सुबह होने पर एक गाँव वाले ने खाई में विनय का शव पाया। पुलिस ने जाँच की और फैसला सुनाया कि वह रात के अँधेरे में गिर गया और उसकी मौत हो गई।
एक हफ्ते बाद, विनय के ऑफिस के एक सहकर्मी को रात में फोन आया। कॉलर आईडी अज्ञात थी। जब उसने फोन उठाया, तो दूसरी तरफ से एक कर्कश आवाज आई:
“तुम… तुम वहाँ हो ना?”
और कहानी फिर से शुरू हुई…
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