ईमानदारी की जीत

ईमानदारी की जीत

दो भाई गंगापुर एक छोटा सा गाँव था जो नदी के किनारे बसा हुआ था। इस गाँव में राम और श्याम नाम के दो भाई रहते थे। दोनों की उम्र में पाँच साल का फर्क था – राम बड़ा और श्याम छोटा। उनके पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था, और माँ ने …

Read more

ज़िंदगी ने फिर मौका दिया

ज़िंदगी ने फिर मौका दिया

अमित का चेहरा सूरज की आखिरी किरणों में डूबे उस पीली-सुर्ख इमारत की तरफ था, लेकिन नज़रें कहीं और थीं। वह बार-बार अपनी कार की स्टीयरिंग पर बंधी सफेद पट्टी को टटोल रहा था, जिस पर “मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट – अपडेटेड” लिखा था। दो साल, छह महीने और सत्रह दिन। इतने समय के बाद वह …

Read more

कच्ची पगडंडी

कच्ची पगडंडी

कच्ची पगडंडी मेघा के लैपटॉप का स्क्रीनसेवर बार-बार बदल रहा था – हिमालय की तस्वीरें, जिन्हें उसने कभी खुद नहीं खींची थी। डेस्क पर रखा हर्बल टी का कप ठंडा पड़ चुका था। बारहवीं मंजिल से दिख रहा मुंबई का शहर अपनी निरंतर गतिशीलता में डूबा हुआ था, पर मेघा का मन कहीं और भटक …

Read more

नानी का मायका

नानी का मायका

नानी का मायका अवनी ने अपने लैपटॉप का लिड बंद कर दिया। मीटिंग का शोर अब भी उसके कानों में गूंज रहा था। ग्रे ग्लास की इमारत से बाहर नीले आसमान को देखकर भी उसकी बेचैनी कम नहीं हुई। पिछले कुछ दिनों से एक अजीब सी खालीपन उसे घेरे हुए थी। शायद यह बैंगलोर की …

Read more

धुन कजरी की, कहानी प्यार की

धुन कजरी की

धुन कजरी की, कहानी प्यार की बनारस की गलियाँ सुबह से ही सरसरा रही थीं। नहीं, हवा नहीं, बातचीत से। “सुनते हो? अम्मा कह रही थीं, आज सावन की पहली सोमवारी है। शहर के बाहर, पुराने पीपल के पेड़ के पास, कोई नया बैंड बजाएगा। कजरी। असली, देशी।” अनन्या के कानों तक यह बात पहुँची …

Read more

लोटा और लाज

लोटा और लाज

खोया हुआ लोटा बाबूजी का अनमोल लोटा रामस्वरूप दास के लिए उनका पीतल का लोटा कोई साधारण बर्तन नहीं था। वह उनकी पहचान थी, उनकी शान थी, उनके पिता की विरासत थी। पचास साल से भी ज्यादा समय से वह उसी लोटे से पानी पीते आ रहे थे। लोटे पर उनके दादा ने उनके नाम …

Read more

पोखरे के किनारे

पोखरे के किनारे

गाँव का वो पुराना पोखरा गर्मियों की एक शाम थी। सूरज ढलने को था और आसमान में नारंगी और बैंगनी रंगों का मेल जैसे किसी चित्रकार की पैलेट पर बिखर गया हो। गाँव के पश्चिमी छोर पर स्थित पोखरे के किनारे बैठी मीनाक्षी की नजरें पानी की सतह पर तैरते कमल के पत्तों पर टिकी …

Read more

लॉकडाउन की सच्ची कहानी: अनचाहे विराम से नई शुरुआत

लॉकडाउन की सच्ची कहानी

24 मार्च 2020 की वह रात, जब प्रधानमंत्री के भाषण के साथ ही पूरा देश थम सा गया। 21 दिन के लॉकडाउन ने हर जीवन को एक अनचाहा विराम दे दिया। राजेश, जो एक छोटे रेस्तरां में मैनेजर थे, के लिए लॉकडाउन का मतलब था नौकरी जाने का डर। घर बैठे-बैठे वे रोज़ अपने मालिक …

Read more

लालटेन की रोशनी: एक भुला दी गई दुनिया

लालटेन की रोशनी

गाँव के उस छोर पर बूढ़े गुरुजी का कच्चा मकान था, जिसकी देहरी पर हमेशा एक पुरानी लालटेन टँगी रहती। उसकी मद्धम पीली रोशनी न सिर्फ रास्ता दिखाती, बल्कि समय के एक पूरे दौर की कहानी कहती। वो दिन जब लालटेन राज करती थी मेरे बचपन की शामें लालटेन की रोशनी में ही ढलती थीं। …

Read more

देसी शादी: रंग, रीत और रिश्तों का महाकुंभ

देसी शादी

दो दिल, दो परिवार उज्जैन के एक मध्यमवर्गीय परिवार में रहने वाली आर्या शर्मा जब पहली बार राहुल मेहरा से मिली, तो उसे एहसास नहीं था कि यह मुलाकात उसके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगी। दोनों की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के जन्मदिन की पार्टी में हुई थी, जहाँ पहली नज़र में ही …

Read more