गुड़ की मिठास

गुड़ की मिठास

गुड़ की मिठास कंप्यूटर स्क्रीन की नीली रोशनी में डूबा प्रतीक, लंदन के अपने ऑफिस की बत्तीसवीं मंजिल से शहर की झिलमिलाती लाइटों को देख रहा था। बाहर कोहरा था, और भीगी सड़कों पर चलते लोग काले कोटों में छिपे हुए से लग रहे थे। उसने अपनी कॉफ़ी का आखिरी घूँट पिया – एक डबल …

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पिता की छाया

पिता की छाया

पहला अध्याय: वह बरगद का पेड़ गाँव की उस पुरानी कोठी के सामने एक विशाल बरगद का पेड़ था, जिसकी छाया में बैठकर पंडित जी दर्ज़ी की दुकान चलाते थे। रोहन के लिए वह पेड़ सिर्फ एक पेड़ नहीं था, वह उसका पूरा बचपन था। उसकी जड़ों में छुपकर खेलना, डालियों पर चढ़ना, और शाम …

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माँ की खामोश दुआएँ

सुबह की पहली किरण ने गाँव के छोटे-से घर की खिड़की को छुआ। माँ आँगन में बैठी रोटी बना रही थी, उसके हाथों में आटे के साथ-साथ एक सूखी पीली डायरी भी थी। यह डायरी उन्होंने तब से रखी थी जब उनका बेटा राजू दस साल का था। आज राजू अमेरिका से लौट रहा था, …

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