आयुषी की शादी की रात थी। समारोह खत्म हो चुका था, और अब वह अपने नए ससुराल के कमरे में बैठी थी। उसका पति, विराट, अभी तक कमरे में नहीं आया था। वह गेस्ट्स को विदा कर रहा था।
तभी दरवाज़ा खुला और विराट की दादी अंदर आईं। उनके हाथ में एक पुराना सा लाल रेशम का डिब्बा था।
“बेटी, हमारे परिवार की एक परंपरा है,” दादी ने कहा, “हर नई दुल्हन को यह गहना दिया जाता है।”
उन्होंने डिब्बा खोला। अंदर एक सोने का हार था – बेहद खूबसूरत, पुराने ज़माने की कारीगरी से बना हुआ। हार के बीच में एक बड़ा माणिक जड़ा हुआ था, जो चांदनी में लाल रक्त की तरह चमक रहा था।
“यह बहुत खूबसूरत है,” आयुषी ने कहा।
दादी ने गंभीर होकर कहा, “इसे हमेशा पहनना। कभी नहीं उतारना। यह परिवार की दुल्हन की रक्षा करता है।”
आयुषी ने हार पहना। वह ठंडा और भारी लगा।
आधी रात को आयुषी एक अजीब सी आवाज़ से जाग गई। ऐसा लग रहा था जैसे कोई फुसफुसा रहा हो। वह उठ बैठी। कमरे में सिर्फ विराट सो रहे थे।
फिर वह आवाज़ फिर सुनाई दी। आयुषी ने महसूस किया कि आवाज़ उसके हार से आ रही थी। वह धीरे से बिस्तर से उतरी और शीशे के सामने खड़ी हो गई।
शीशे में उसकी परछाई के पीछे एक और परछाई दिखाई दी। एक औरत की, जो उसके पीछे खड़ी थी।
आयुषी ने तेज़ी से पलटकर देखा। पीछे कोई नहीं था।
लेकिन शीशे में वह औरत अभी भी वहाँ थी। वह मुस्कुरा रही थी, और उसके गले में भी वही हार था।
अगले दिन आयुषी ने दादी से पूछा, “यह हार कहाँ से आया?”
दादी ने एक गहरी सांस ली, “यह कहानी बहुत पुरानी है। सौ साल पहले, हमारे परिवार में एक दुल्हन आई थी – मीरा। उसकी शादी के तीन दिन बाद ही उसकी मृत्यु हो गई। कहते हैं उसके पति ने ही उसे जहर दे दिया था क्योंकि उसे दूसरी औरत से प्यार था।”
“उस मीरा के पास यही हार था,” दादी ने आगे कहा, “मरने से पहले उसने शाप दिया कि इस परिवार की हर दुल्हन को यह हार पहनना होगा। और जो भी इसे उतारेगा, उसकी मृत्यु हो जाएगी।”
आयुषी ने डरते हुए पूछा, “क्या यह सच है?”
“सात दुल्हनें अब तक इस हार को पहन चुकी हैं,” दादी ने कहा, “सब की मृत्यु अचानक हुई। शादी के एक साल के अंदर।”
आयुषी ने हार उतारने की कोशिश की। लेकिन जैसे ही उसने क्लास्प खोलना चाहा, उसे तेज़ दर्द महसूस हुआ। हार गले से चिपक गया था, जैसे जीवित हो।
वह रोज़ शीशे में उस औरत को देखती। औरत का रूप धीरे-धीरे स्पष्ट होता जा रहा था। वह मीरा थी।
एक रात, आयुषी ने साहस जुटाया और शीशे में मीरा से पूछा, “तुम क्या चाहती हो?”
मीरा ने जवाब दिया, आवाज़ सीधे आयुषी के मन में गूंजी, “मैं आज़ाद होना चाहती हूँ। लेकिन मैं तभी आज़ाद हो सकती हूँ जब कोई मेरी जगह ले ले।”
“मेरी जगह?” आयुषी ने पूछा।
“हाँ। तुम मेरी तरह मर जाओगी, और मैं तुम्हारे शरीर में जीवित हो जाऊँगी। यही इस हार का शाप है।”
आयुषी ने परिवार के पुराने रिकॉर्ड्स खोजने शुरू किए। उसे एक पुरानी डायरी मिली जो मीरा की थी। डायरी पढ़ते हुए उसे सच्चाई पता चली।
मीरा की मौत जहर से नहीं हुई थी। उसे उसके पति ने मारा था क्योंकि उसे पता चल गया था कि मीरा किसी और से प्यार करती थी। मरते वक्त मीरा ने जो शाप दिया, वह उसके पति के लिए था – “तुम्हारी हर पत्नी मेरी तरह मरेगी।”
लेकिन समय के साथ कहानी बदल गई। अब शाप हर दुल्हन को लग रहा था।
आयुषी ने विराट को सब कुछ बताने का फैसला किया। लेकिन जैसे ही उसने बताना शुरू किया, हार ने उसका गला दबोचना शुरू कर दिया। वह बोल नहीं पा रही थी।
एक हफ्ते बाद, दादी की अचानक मौत हो गई। डॉक्टरों ने कहा दिल का दौरा पड़ा। लेकिन आयुषी जानती थी सच क्या था।
दादी ने मरने से पहले आयुषी को एक नोट दिया था: “हार तभी उतरेगा जब सच सामने आएगा। परिवार का राज़ दफ़्न रहना चाहिए।”
आयुषी ने महसूस किया कि दादी भी इस रहस्य का हिस्सा थीं। शायद पहली दुल्हन के बाद से, परिवार की सभी औरतें इस हार के शाप के बारे में जानती थीं, लेकिन चुप रहती थीं।
वह मीरा से फिर बात करने की कोशिश कर रही थी, तभी उसने एक नई बात देखी। शीशे में अब सिर्फ मीरा नहीं थी – उसके पीछे छह और औरतें थीं। पिछली छह दुल्हनें।
आयुषी ने सातों आत्माओं से बात की। उसे पता चला कि हर दुल्हन की मौत एक जैसी नहीं हुई थी। कुछ की बीमारी से, कुछ की दुर्घटना से। लेकिन एक बात समान थी – सबने इस हार को पहना था, और सबकी मौत शादी के पहले साल के अंदर हुई थी।
मीरा ने बताया, “हम सब फंसी हुई हैं। जब तक एक नई दुल्हन नहीं आती, हम में से कोई आज़ाद नहीं हो सकता। तुम आठवीं हो। तुम्हारी मौत के बाद, मैं आज़ाद हो जाऊँगी, और बाकी छह एक कदम आगे बढ़ जाएँगी।”
“और तुम सब कब तक फंसी रहोगी?” आयुषी ने पूछा।
“जब तक यह परिवार खत्म नहीं हो जाता। या फिर जब तक कोई सच सामने नहीं लाता।”
आयुषी ने फैसला किया कि वह इस चक्र को तोड़ेगी। उसने परिवार के सभी सदस्यों को एकत्र किया – विराट, उसके माता-पिता, चाचा-चाची।
वह बोलने लगी, “मुझे पता है सच्चाई। मीरा की मौत…”
लेकिन फिर वही हुआ। हार ने उसका गला दबोचना शुरू कर दिया। परिवार वाले देखते रहे, लेकिन कोई कुछ नहीं बोला। वे जानते थे। सब जानते थे।
तभी विराट बोला, “बस करो! मैं जानता हूँ सब कुछ।”
सबने विराट की ओर देखा। उसने कहा, “दादी ने मरने से पहले मुझे सब कुछ बता दिया था। मैंने शोध किया। मीरा मेरी परदादी थीं। उनके पति, यानी मेरे परदादा, ने उन्हें मारा था।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
विराट ने आयुषी के पास आकर हार को छुआ। “मैं परिवार की ओर से माफ़ी माँगता हूँ,” उसने कहा।
तभी एक अजीब सी घटना हुई। हार अपने आप खुल गया। आयुषी के गले से नीचे गिरा।
जमीन पर गिरते ही हार टूट गया। माणिक निकलकर दूर जा लुढ़का। और हार के टूटते ही, कमरे में सात धुंधली आकृतियाँ प्रकट हुईं।
मीरा आगे आई। उसने विराट और आयुषी की ओर देखा, और मुस्कुराई। फिर सभी आकृतियाँ धीरे-धीरे गायब होने लगीं।
आखिर में सिर्फ मीरा बची। उसने आयुषी से कहा, “शुक्रिया। हम आज़ाद हैं। अब यह शाप खत्म हो गया।”
और वह भी गायब हो गई।
एक साल बाद, आयुषी और विराट उसी कमरे में बैठे थे। टूटा हार अब एक शीशे के केस में रखा था, एक याद के तौर पर।
आयुषी गर्भवती थी। डॉक्टर ने कहा था कि लड़की होगी।
एक रात, आयुषी ने सपना देखा। मीरा और बाकी छह दुल्हनें उसके सपने में आईं। सब ने खुशी-खुशी उसे देखा।
मीरा ने कहा, “तुम्हारी बेटी सुरक्षित रहेगी। शाप खत्म हो गया है।”
आयुषी जाग गई। उसने महसूस किया कि उसका पेट हल्का सा चमक रहा था। वह खिड़की के पास गई। चाँदनी में, उसे सात औरतें दिखाई दीं, दूर खड़ी, मुस्कुराती हुई।
वे हाथ हिलाकर विदा हो रही थीं।
आयुषी ने भी हाथ हिलाया। उसे लगा जैसे वे सब कह रही हों – अलविदा, और शुक्रिया।
उसने अपने पेट पर हाथ रखा। “तुम्हें कभी यह हार नहीं पहनना पड़ेगा,” उसने फुसफुसाया।
और उसे लगा जैसे उसकी बेटी ने हल्का सा हरकत किया हो – हाँ कहते हुए।
~ समाप्त ~
क्योंकि कभी-कभी सबसे खूबसूरत गहने सबसे भयंकर शाप छुपाए होते हैं, और सच्चाई ही एकमात्र चाबी होती है जो उन शापों को तोड़ सकती है।
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