एक ऐसा बचपन जहाँ खिलौने नहीं, जिम्मेदारियाँ थीं हिमाचल प्रदेश के एक दूरस्थ गाँव "मलाणा" में, जो समुद्र तल से…
गाँव की मिट्टी में उगा सपना बिहार के एक दूरस्थ गाँव, जहाँ बिजली एक विलासिता थी और पक्की सड़क एक…
अंधेरी कोठरी से पहली किरण तक दिल्ली के उन तंग गलियों में, जहाँ सूरज की रोशनी भी घुसने से कतराती…
कच्ची पगडंडी मेघा के लैपटॉप का स्क्रीनसेवर बार-बार बदल रहा था - हिमालय की तस्वीरें, जिन्हें उसने कभी खुद नहीं…
नानी का मायका अवनी ने अपने लैपटॉप का लिड बंद कर दिया। मीटिंग का शोर अब भी उसके कानों में…
धुन कजरी की, कहानी प्यार की बनारस की गलियाँ सुबह से ही सरसरा रही थीं। नहीं, हवा नहीं, बातचीत से।…
गाँव की वो पुरानी पीपल, जिसकी जड़ें धरती के नीचे कितना फैल चुकी थीं, कोई नहीं जानता था। लेकिन उसकी…
उस सुबह जब पहली किरण अभी पीपल के पत्तों को छू भी नहीं पाई थी, मास्टर जी पहले ही विद्यालय…
खोया हुआ लोटा बाबूजी का अनमोल लोटा रामस्वरूप दास के लिए उनका पीतल का लोटा कोई साधारण बर्तन नहीं था।…
गाँव का वो पुराना पोखरा गर्मियों की एक शाम थी। सूरज ढलने को था और आसमान में नारंगी और बैंगनी…
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