इमानदारी की जीत: रामू काका की कहानी
गरीबी में भी इमानदारी पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में एक छोटी सी झोपड़ी में रामू काका रहते थे। सत्तर साल के रामू काका सुबह चार बजे उठते, अपनी पुरानी रिक्शा साफ करते, और सुबह पांच बजे तक स्टेशन पहुँच जाते। दिनभर रिक्शा चलाकर जो कुछ कमाते, उससे घर का खर्च चलता। पत्नी की मृत्यु …