लोटा और लाज
खोया हुआ लोटा बाबूजी का अनमोल लोटा रामस्वरूप दास के लिए उनका पीतल का लोटा कोई साधारण बर्तन नहीं था। वह उनकी पहचान थी, उनकी शान थी, उनके पिता की विरासत थी। पचास साल से भी ज्यादा समय से वह उसी लोटे से पानी पीते आ रहे थे। लोटे पर उनके दादा ने उनके नाम …