पहाड़ों को चीरता हुआ सूरज: मोहन की मेहनत से सफलता तक की यात्रा
एक ऐसा बचपन जहाँ खिलौने नहीं, जिम्मेदारियाँ थीं हिमाचल प्रदेश के एक दूरस्थ गाँव “मलाणा” में, जो समुद्र तल से 10,000 फीट की ऊँचाई पर बसा है, मोहन का जन्म हुआ। उसके पिता एक छोटे से खेत में मजदूरी करते थे और माँ गाँव के लोगों के घरों में चूल्हा-चौका करके परिवार चलाती थीं। मोहन …