ईमानदार लकड़हारा: एक समृद्ध कहानी
गाँव की शुरुआत सुबह के पहले किरणों के साथ ही रामू कुल्हाड़ी उठाकर जंगल की ओर चल पड़ा। वह सुंदरपुर गाँव का एक साधारण लकड़हारा था, जिसकी ईमानदारी के चर्चे पूरे इलाके में थे। रामू की उम्र चालीस वर्ष थी, लेकिन जीवन की मेहनत ने उसके चेहरे पर समय से पहले ही झुर्रियां डाल दी …