माँ की खामोश दुआएँ
सुबह की पहली किरण ने गाँव के छोटे-से घर की खिड़की को छुआ। माँ आँगन में बैठी रोटी बना रही थी, उसके हाथों में आटे के साथ-साथ एक सूखी पीली डायरी भी थी। यह डायरी उन्होंने तब से रखी थी जब उनका बेटा राजू दस साल का था। आज राजू अमेरिका से लौट रहा था, …