तीन बजे का आईना

तीन बजे का आईना अरुण की ज़िंदगी एक सुव्यवस्थित मेट्रोनोम की तरह चलती थी। सुबह छह बजे की अलार्म घड़ी, बिना किसी बहाने के दस मिनट के भीतर बिस्तर छोड़ना, रोज़ाना पाँच किलोमीटर की दौड़, नौ बजे तक ऑफिस की कुर्सी पर बैठना, और रात दस बजे फिर से बिस्तर। सात साल से यही दिनचर्या। …

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