बैलगाड़ी का सफर

बैलगाड़ी का सफर

बैलगाड़ी की पुरानी चरचराहट जंगल की सन्नाटे को चीर रही थी। बसंत सिंह गाड़ी के आगे वाले हिस्से में बैठा अपने बैलों को हाँक रहा था। उसकी उम्र साठ साल के आसपास थी, पर उसके हाथों में वही मजबूती थी जो तीस साल पहले हुआ करती थी जब वह पहली बार इसी रास्ते से गुजरा …

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