गांव की बिजली: स्वावलंबन की एक चिंगारी

गांव की बिजली: स्वावलंबन की एक चिंगारी

एक समय की बात है जब एक गाँव ने सरकारी योजनाओं का इंतज़ार छोड़ अपनी बिजली खुद बनाने का फैसला किया। यह कहानी है सामुदायिक एकजुटता, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की। अँधेरे में डूबा गाँव और एक अधूरा सपना सिमराहा गाँव की शामें सूरज ढलते ही शुरू हो जाती थीं। जैसे ही सूर्य की अंतिम किरणें …

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खेतों का राजा

खेतों का राजा

मेरे गाँव में एक कहावत थी—”जिसके पास ज़मीन, उसके पास ज़िंदगी।” और हमारे गाँव में सबसे ज़्यादा ज़मीन थी बाबू शिवनारायण सिंह के पास। पचासी बीघा उपजाऊ ज़मीन, जो गाँव के तीनों ओर फैली हुई थी, मानो पूरा गाँव उनकी हथेली पर बसा हो। बाबू शिवनारायण सिंह—जिन्हें सब “राजा साहब” कहते थे। अस्सी साल के …

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