Emotional Story

पिता की छाया

पहला अध्याय: वह बरगद का पेड़

गाँव की उस पुरानी कोठी के सामने एक विशाल बरगद का पेड़ था, जिसकी छाया में बैठकर पंडित जी दर्ज़ी की दुकान चलाते थे। रोहन के लिए वह पेड़ सिर्फ एक पेड़ नहीं था, वह उसका पूरा बचपन था। उसकी जड़ों में छुपकर खेलना, डालियों पर चढ़ना, और शाम को पिता के साथ उसकी छाया में बैठकर कहानियाँ सुनना।

“बेटा,” पिता कहते थे, “इस पेड़ की तरह बनो। जिसकी छाया में पूरा गाँव थकान मिटाए, पर जो कभी अपनी थकान किसी को न दिखाए।”

रोहन उनकी बातें सुनता, पर समझ नहीं पाता था। वह तो बस यह जानता था कि जब भी वह डरता, दुखी होता या खोया-खोया सा महसूस करता, पिता की छाया हमेशा उसके साथ होती थी।

दूसरा अध्याय: बिखरते सपने

साल बीते। रोहन शहर पढ़ने चला गया। कोठी में अब सिर्फ पिता रह गए थे। वह अभी भी उसी बरगद की छाया में बैठते, पर अब उनके पास सुनने वाला कोई नहीं था। रोहन की व्यस्तता बढ़ती गई—नौकरी, प्रमोशन, शादी, फ्लैट की किश्तें। फोन पर बातें छोटी होती गईं, यात्राएँ कम।

एक दिन पिता का फोन आया, “बेटा, पेड़… थोड़ा सूख रहा है।”

रोहन ने जल्दी से कहा, “पापा, गमलों वाले पौधे रख लो। यह पुराने पेड़ की देखभाल करना मुश्किल होता है।”

फोन के दूसरे छोर पर सन्नाटा रहा। फिर पिता ने कहा, “हाँ… ठीक है। तू अपना ध्यान रख।”

रोहन ने फोन रख दिया। उसे नहीं पता था कि पिता ने उस दिन पेड़ के तने से सिर टिकाकर घंटों बैठे रहने में गुज़ार दिए।

तीसरा अध्याय: वह वापसी

दस साल बाद, जब माँ की तबीयत बिगड़ी, तो रोहन गाँव लौटा। कोठी वैसी ही थी, पर बरगद का पेड़ सचमुच सूख रहा था। उसकी पत्तियाँ पीली पड़ गई थीं, डालियाँ नाज़ुक हो चली थीं।

पिता अब कमज़ोर हो चुके थे, पर उनकी आदत नहीं बदली थी। वह अभी भी उसी पेड़ के नीचे बैठते। रोहन ने देखा—पिता की पीठ अब झुक गई थी, बाल सफेद हो चुके थे, पर वह मुस्कुराहट वही थी।

“पापा, यह पेड़…” रोहन ने कहना शुरू किया।

“हाँ बेटा,” पिता ने उसकी बात काटते हुए कहा, “पेड़ बूढ़ा हो गया है। पर अभी भी इसकी छाया में बैठकर अच्छा लगता है।”

चौथा अध्याय: डायरी का राज

एक शाम रोहन को पिता की पुरानी डायरी मिली। उसमें लिखा था:

“आज रोहन ने पहला कदम उठाया। वह डर रहा था, पर मैंने उसे छाया में खड़े होकर देखा। वह जानता है कि मैं यहाँ हूँ।”

“रोहन स्कूल में प्रथम आया। वह मेरे पास दौड़कर आया। मैंने कहा—’बस इतना ही काफी है।’ अंदर से मैं फूला नहीं समा रहा था।”

“आज वह शहर गया है। मेरी छाया अब उसके साथ नहीं जा सकती। पर मेरी दुआएँ तो उसके साथ हैं न?”

“पेड़ सूख रहा है। शायद मेरी छाया भी अब उतनी लंबी नहीं रही। पर कोई बात नहीं, रोहन अब अपनी छाया खुद बना सकता है।”

डायरी पढ़ते-पढ़ते रोहन की आँखें भर आईं। उसे अब समझ आया—यह पेड़ कभी सिर्फ पेड़ नहीं था। यह पिता का प्रतीक था, जिसकी छाया ने उसे हर तूफान से बचाया था।

पाँचवाँ अध्याय: नई शुरुआत

अगले दिन रोहन ने एक बागवान को बुलाया। उन्होंने पेड़ के आसपास की मिट्टी को समृद्ध किया, जड़ों को पोषण दिया। रोहन खुद भी पिता के साथ बैठकर पेड़ की देखभाल करने लगा।

“पापा,” एक दिन उसने कहा, “मुझे अब समझ आया कि आपकी छाया का क्या मतलब है।”

पिता ने पूछा, “क्या मतलब है बेटा?”

“वह सुरक्षा जो बिना कुछ माँगे मिलती है। वह मौन समर्थन जो हर पल साथ रहता है। वह ठंडी छाँव जो बिना शोर मचाए सबका थकान हर लेती है।”

पिता की आँखें चमक उठीं। उन्होंने रोहन का हाथ थाम लिया।

छठा अध्याय: विरासत

कुछ महीनों बाद पेड़ में फिर से हरियाली लौट आई। नई पत्तियाँ निकलीं, नई डालियाँ फैलीं। उसी साल, रोहन के घर एक बच्चे ने जन्म लिया।

जब वह बच्चा थोड़ा बड़ा हुआ, तो रोहन उसे लेकर गाँव आया। वह उसे बरगद के पेड़ के नीचे ले गया, जहाँ पिता अब भी बैठते थे।

“देखो,” रोहन ने अपने बेटे से कहा, “यह तुम्हारे दादा हैं। और यह पेड़… यह हमारे परिवार की विरासत है।”

पिता ने पोते को गोद में उठा लिया। बच्चा हँसा। उसकी हँसती हुई छवि पेड़ की घनी छाया में नाच उठी।

रोहन ने महसूस किया—पिता की छाया अब तीन पीढ़ियों को ढाँप रही थी। वह कभी सूखी नहीं, बस रूप बदल रही थी।

सातवाँ अध्याय: अनंत छाया

एक साल बाद पिता चले गए। पर बरगद का पेड़ हरा-भरा खड़ा था। रोहन ने गाँव में रहने का फैसला किया। अब वह उसी छाया में बैठता, अपने बेटे को कहानियाँ सुनाता।

“पापा,” एक दिन उसके बेटे ने पूछा, “यह पेड़ इतना बड़ा कैसे हो गया?”

रोहन ने उसे गले लगाते हुए कहा, “इसे प्यार मिला बेटा। और प्यार से बढ़कर कोई खाद नहीं होती।”

शाम ढलने लगी। पेड़ की छाया लंबी होती जा रही थी, कोठी के आँगन तक फैल रही थी। रोहन ने देखा—उसकी अपनी छाया भी अब लंबी हो चली थी। वह मुस्कुराया।

पिता सही कहते थे—छाया कभी मरती नहीं। वह तो बस एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित होती रहती है। और इस तरह, पिता की छाया अनंत काल तक जीवित रहती है—मूक, मगर मजबूत; दिखाई देने वाली, मगर अस्पृश्य; भौतिक, मगर आध्यात्मिक।

छाया की भाषा

पिता की छाया एक भाषा है जो शब्दों में नहीं, बल्कि उपस्थिति में बोली जाती है। वह सुरक्षा का वह आश्वासन है जो कभी माँगता नहीं, बस देता है। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि जीवन की भागदौड़ में हम अक्सर उस छाया को भूल जाते हैं जिसने हमें पनपने दिया।

पर सच तो यह है कि चाहे हम कितनी भी दूर चले जाएँ, पिता की छाया हमेशा हमारे साथ रहती है—हमारे चरित्र में, हमारे मूल्यों में, हमारे फैसलों में। और जब हम खुद माता-पिता बनते हैं, तो हम उसी छाया को आगे बढ़ाते हैं।

क्योंकि पिता की छाया सिर्फ एक पेड़ की छाया नहीं होती—वह तो प्यार, त्याग और विरासत का वह वृक्ष है जिसकी जड़ें अनंत काल तक फैली रहती हैं।

desistory

Welcome to DesiStory2.com! I am the creator and author behind this website, passionate about storytelling, creative writing, and sharing engaging desi narratives. Writing has always been a way for me to express ideas, emotions, and everyday experiences through words. Through DesiStory2.com, my goal is to: Share meaningful and entertaining stories Build a community of readers and writers Promote originality and creativity Deliver consistent and high-quality content Thank you for being part of this journey and supporting independent content creation.

Recent Posts

Michelle Yeoh & Sean Baker’s ‘Sandiwara’ Sets Berlinale Premiere

Berlin, Germany – In a major coup for the Berlin International Film Festival, the world…

3 weeks ago

Goa’s Proposal to Ban Social Media for Under-16s

The Chief Minister of Goa, Pramod Sawant, has stated that the state government is considering…

3 weeks ago

Democrat Taylor Rehmet pulls off shock victory in deep-red Texas Senate special election

TARRANT COUNTY, Texas — In a political race that has captivated local voters and drawn…

4 weeks ago

Real Madrid Secure Hard-Fought Victory Over Rayo Vallecano to Tighten Grip on La Liga

MADRID, SPAIN – In a capital derby that proved more challenging than many anticipated, league…

4 weeks ago

Melania Trump: A Documentary Exploration of America’s Enigmatic First Lady

In an era where political spouses are expected to be both accessible and relatable, Melania…

4 weeks ago

What is Moltbook? A Beginner’s Guide to AI Agents and Multi-Agent Systems

In today’s fast-evolving tech landscape, AI agents are becoming essential tools for automating complex tasks,…

4 weeks ago

This website uses cookies.