देसी शादी: रंग, रीत और रिश्तों का महाकुंभ

देसी शादी

दो दिल, दो परिवार उज्जैन के एक मध्यमवर्गीय परिवार में रहने वाली आर्या शर्मा जब पहली बार राहुल मेहरा से मिली, तो उसे एहसास नहीं था कि यह मुलाकात उसके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगी। दोनों की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के जन्मदिन की पार्टी में हुई थी, जहाँ पहली नज़र में ही …

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इमानदारी की जीत: रामू काका की कहानी

इमानदारी की जीत: रामू काका की कहानी

गरीबी में भी इमानदारी पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में एक छोटी सी झोपड़ी में रामू काका रहते थे। सत्तर साल के रामू काका सुबह चार बजे उठते, अपनी पुरानी रिक्शा साफ करते, और सुबह पांच बजे तक स्टेशन पहुँच जाते। दिनभर रिक्शा चलाकर जो कुछ कमाते, उससे घर का खर्च चलता। पत्नी की मृत्यु …

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असफलता से सीखकर सफलता तक: रोहित की कहानी

असफलता से सीखकर सफलता तक: रोहित की कहानी

असफलता से सीखकर सफलता तक: रोहित की कहानी रोहित मध्यमवर्गीय परिवार से था। उसके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और माँ गृहणी। पूरे परिवार का सपना था कि रोहित इंजीनियर बने। बारहवीं कक्षा में 95% अंक लाने के बाद, रोहित ने IIT की तैयारी शुरू की। एक साल तक दिन-रात मेहनत की, कोचिंग ज्वाइन …

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ईमानदार लकड़हारा: एक समृद्ध कहानी

ईमानदार लकड़हारा

गाँव की शुरुआत सुबह के पहले किरणों के साथ ही रामू कुल्हाड़ी उठाकर जंगल की ओर चल पड़ा। वह सुंदरपुर गाँव का एक साधारण लकड़हारा था, जिसकी ईमानदारी के चर्चे पूरे इलाके में थे। रामू की उम्र चालीस वर्ष थी, लेकिन जीवन की मेहनत ने उसके चेहरे पर समय से पहले ही झुर्रियां डाल दी …

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मेले वाली रात

मेले वाली रात

रात का सन्नाटा चादर की तरह गाँव पर बिछा हुआ था, पर दूर से आते हुए ढोल की आवाज़ उस सन्नाटे को चीरती हुई रामकिशोर के कानों तक पहुँच रही थी। वह अपनी झोपड़ी के बाहर बैठा चिलम खींच रहा था। आँखें बंद करके वह उस आवाज़ को सुन रहा था जो हर साल इसी …

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बैलगाड़ी का सफर

बैलगाड़ी का सफर

बैलगाड़ी की पुरानी चरचराहट जंगल की सन्नाटे को चीर रही थी। बसंत सिंह गाड़ी के आगे वाले हिस्से में बैठा अपने बैलों को हाँक रहा था। उसकी उम्र साठ साल के आसपास थी, पर उसके हाथों में वही मजबूती थी जो तीस साल पहले हुआ करती थी जब वह पहली बार इसी रास्ते से गुजरा …

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सीढ़ियों की आवाज

सीढ़ियों की आवाज

खाली घर की पहली रात प्रतीक ने बड़ी मुश्किल से उस पुराने बंगले का किराया तय किया था। शहर से दूर, जंगल के किनारे, तीन मंजिला यह इमारत सस्ती थी क्योंकि कोई इसे किराए पर लेना नहीं चाहता था। मकान मालिक ने चाबी देते हुए कहा था, “रात को ऊपर की मंजिल पर मत जाना।” …

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आम का पेड़ एक गाँव की विरासत

आम का पेड़ एक गाँव की विरासत

आम का पेड़ एक गाँव की विरासत सुबह की पहली किरण ने जब चंपानगर गाँव को स्पर्श किया, तो सबसे पहले वह विशाल आम के पेड़ की पत्तियों पर ठहरी। यह पेड़ गाँव के बीचों-बीच, चौराहे पर खड़ा था, मानो पूरे गाँव का संरक्षक हो। इसकी शाखाएँ इतनी फैली हुई थीं कि लगभग आधा एकड़ …

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चाचा का रेडियो ध्वनियों का खजाना

चाचा का रेडियो

चाचा का रेडियो ध्वनियों का खजाना सन् 1965 की गर्मियों की वह शाम, जब चाचा श्रीकांत प्रसाद मिश्रा अपने साथ एक बड़ा सा लकड़ी का डिब्बा लेकर गाँव लौटे, आज भी गाँव के बुजुर्गों की स्मृति में ताजा है। उस डिब्बे में था एक रेडियो – फिलिप्स कंपनी का, ब्राउन रंग का, सामने मखमली कपड़े …

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गुड़ की मिठास

गुड़ की मिठास

गुड़ की मिठास कंप्यूटर स्क्रीन की नीली रोशनी में डूबा प्रतीक, लंदन के अपने ऑफिस की बत्तीसवीं मंजिल से शहर की झिलमिलाती लाइटों को देख रहा था। बाहर कोहरा था, और भीगी सड़कों पर चलते लोग काले कोटों में छिपे हुए से लग रहे थे। उसने अपनी कॉफ़ी का आखिरी घूँट पिया – एक डबल …

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