पिता की चुपचाप कुर्बानियाँ: एक अनकही दास्तां

पिता की चुपचाप कुर्बानियाँ: एक अनकही दास्तां

वह सुबह जब सब कुछ बदल गया राहुल को याद था वह सुबह – 15 जून, 2005। वह दसवीं कक्षा में था और उस दिन उसकी गणित की परीक्षा थी। सुबह पाँच बजे, जब वह पढ़ाई कर रहा था, उसने देखा कि उसके पिता, श्री महेश शर्मा, चुपचाप तैयार हो रहे हैं। उनकी आँखों में …

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मौत का फोन कॉल

विनय अपने नए घर की तीसरी मंजिल से उतर रहा था। पिछले हफ्ते ही वह इस इमारत में शिफ्ट हुआ था। आधी रात के करीब का समय था। लिफ्ट खराब होने की वजह से उसे सीढ़ियों से ही उतरना पड़ रहा था। सीढ़ियों की रोशनी टिमटिमा रही थी। हर मोड़ पर एक बल्ब जरूर था, …

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वो आईना: एक पुरानी डरावनी कहानी

वो आईना: एक पुरानी डरावनी कहानी

प्रोफेसर अरुण वर्मा पुरातत्वविद् थे, जिन्हें एक खंडहर मंदिर में खुदाई के दौरान एक असामान्य आईना मिला। यह आईना तांबे और चांदी से जड़ा हुआ था, उसकी सतह पर प्राचीन संस्कृत में लिखा था: “जो देखेगा, वह भुगतेगा।” प्रोफेसर ने उसे अपने घर ले आए, अपनी संग्रहालय की तरह दिखने वाली स्टडी में रख दिया। …

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राजस्थान की चुड़ैल – एक दहला देने वाली कहानी

रेत का भूत वह सर्दी की रात थी। राजस्थान के थार रेगिस्तान में चाँदनी इतनी तेज थी कि रेत के टीलों पर छायाएँ साफ दिख रही थीं। स्थानीय गाइड मोहन सिंह अपने पर्यटक समूह को कह रहा था: “आधी रात के बाद कैंप से बाहर मत निकलना। यहाँ रेत में कुछ ऐसा है जो मनुष्य …

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भूतिया हवेली

भूतिया हवेली

शिमला की ठंडी हवाओं में जब मेहक सिंह ने उस विज्ञापन को देखा, तो वह अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर पाया। “वॉचमैन चाहिए – ग्लेनव्यू हवेली, शिमला। रात की शिफ्ट। अच्छा वेतन। डरपोक लोग न आएँ।” वेतन इतना अच्छा था कि मेहक सिंह ने तुरंत संपर्क किया। उसे पिछले महीने ही अपनी फैक्टरी की …

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चुड़ैल की चप्पल

चुड़ैल की चप्पल

वैसे तो अमरनाथ तिवारी को अपनी नई नौकरी और शहर से आने वाली इस पोस्टिंग पर बहुत गर्व था, लेकिन सात दिन बीतते-बीतते उसका यह गर्व एक अनजाने डर में बदल चुका था। छोटे शहर रामपुर में असिस्टेंट कलेक्टर की नौकरी मिलना कोई मामूली बात नहीं थी, पर उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी – …

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हल चलाता किसान: मिट्टी और पसीने की कहानी

हल चलाता किसान: मिट्टी और पसीने की कहानी

रामसिंह सुबह चार बजे ही उठ गया। पूर्वी आकाश में अभी तारे झिलमिला रहे थे और ठंडी हवा में खेतों से आती नमी की गंध उसके नथुनों में समा रही थी। उसने चूल्हे पर बची हुई रात की चाय गर्म की और एक घूँट लेकर अपने खेतों की ओर देखा। पांच एकड़ ज़मीन – न …

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लॉकडाउन की सच्ची कहानी: अनचाहे विराम से नई शुरुआत

लॉकडाउन की सच्ची कहानी

24 मार्च 2020 की वह रात, जब प्रधानमंत्री के भाषण के साथ ही पूरा देश थम सा गया। 21 दिन के लॉकडाउन ने हर जीवन को एक अनचाहा विराम दे दिया। राजेश, जो एक छोटे रेस्तरां में मैनेजर थे, के लिए लॉकडाउन का मतलब था नौकरी जाने का डर। घर बैठे-बैठे वे रोज़ अपने मालिक …

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लालटेन की रोशनी: एक भुला दी गई दुनिया

लालटेन की रोशनी

गाँव के उस छोर पर बूढ़े गुरुजी का कच्चा मकान था, जिसकी देहरी पर हमेशा एक पुरानी लालटेन टँगी रहती। उसकी मद्धम पीली रोशनी न सिर्फ रास्ता दिखाती, बल्कि समय के एक पूरे दौर की कहानी कहती। वो दिन जब लालटेन राज करती थी मेरे बचपन की शामें लालटेन की रोशनी में ही ढलती थीं। …

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गांव की बिजली: स्वावलंबन की एक चिंगारी

गांव की बिजली: स्वावलंबन की एक चिंगारी

एक समय की बात है जब एक गाँव ने सरकारी योजनाओं का इंतज़ार छोड़ अपनी बिजली खुद बनाने का फैसला किया। यह कहानी है सामुदायिक एकजुटता, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की। अँधेरे में डूबा गाँव और एक अधूरा सपना सिमराहा गाँव की शामें सूरज ढलते ही शुरू हो जाती थीं। जैसे ही सूर्य की अंतिम किरणें …

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