सुनहरा अंडा देने वाली मुर्गी

एक साधारण किसान की दिनचर्या

गोपाल का गाँव और परिवार

गंगापुर गाँव में गोपाल नाम का एक किसान रहता था। वह मेहनती और ईमानदार था, लेकिन गरीबी उसका पीछा नहीं छोड़ रही थी। उसकी पत्नी सीता और दो बच्चे – रामू (10 वर्ष) और सीता (8 वर्ष) – उसके साथ रहते थे। गोपाल के पास दो एकड़ जमीन थी, जिस पर वह गेहूँ और चावल की खेती करता था। मौसम अच्छा रहता तो खाने-पीने का गुजारा हो जाता, लेकिन बचत नाममात्र की होती।

एक दिन सीता ने गोपाल से कहा, “स्वामी, रामू को नए स्कल की जरूरत है और सीता के जूते फट गए हैं। अगले महीने स्कूल फीस भी देनी है।”

गोपाल ने चिंतित होकर कहा, “मैं जानता हूँ प्रिय, लेकिन फसल अभी तैयार नहीं हुई है। कल मैं शहर जाकर मजदूरी करके कुछ पैसे कमा लूंगा।”

भाग्य का मोड़

अगले दिन गोपाल शहर जाने के लिए तैयार हो रहा था कि तभी उसने अपने घर के पीछे बने चिकन शेड से एक अजीब सी चमक देखी। वह जिज्ञासावश वहाँ गया। उसने देखा कि उसकी एक मुर्गी – जिसे वह सोना पुकारता था – ने एक चमकदार सुनहरा अंडा दिया था।

गोपाल ने अंडा उठाया। यह साधारण अंडे से थोड़ा भारी था और पूरी तरह से सोने जैसा चमक रहा था। “यह क्या आश्चर्य है!” गोपाल चिल्लाया।

सीता दौड़ी हुई आई। “क्या हुआ स्वामी? तुम इतने उत्तेजित क्यों हो?”

गोपाल ने सुनहरा अंडा सीता को दिखाया। “देखो! सोना ने यह अंडा दिया है।”

पहला सुनहरा अंडा

सोने की जाँच

सीता ने अंडा देखा तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। “यह तो सचमुच सोने का लगता है! लेकिन यह कैसे संभव है?”

गोपाल ने अंडा लेकर गाँव के सुनार मोहनलाल के पास गया। मोहनलाल ने अंडे को ध्यान से देखा, उसे तौला और फिर अपने उपकरणों से जाँच की।

“गोपाल!” मोहनलाल ने आश्चर्य से कहा, “यह अंडा शुद्ध सोने का है! तुम्हें कहाँ से मिला?”

गोपाल ने सारी कहानी सुनाई। मोहनलाल ने कहा, “यह तो चमत्कार है! मैं तुम्हें इस अंडे के बदले पचास हज़ार रुपये दे सकता हूँ।”

गोपाल की खुशी का ठिकाना न रहा। पचास हज़ार रुपये! इतने पैसे तो उसने कभी एक साथ नहीं देखे थे।

नई आशा

गोपाल पैसे लेकर घर लौटा। उसने सीता को सारी बात बताई। सीता की आँखों में आँसू आ गए। “भगवान ने हमारी प्रार्थना सुन ली!”

उस दिन गोपाल ने बच्चों के लिए नए कपड़े, जूते और स्कूल की फीस भर दी। कुछ पैसे से उसने घर की मरम्मत करवाई और कुछ बचत के लिए रख लिए।

शाम को गोपाल ने सोना मुर्गी को विशेष दाना खिलाया और उसके घोंसले को नरम घास से सजाया। “तुम हमारी किस्मत बदलने वाली हो सोना,” गोपाल ने प्यार से कहा।

रोज का चमत्कार

नियमित सुनहरे अंडे

अगले दिन सुबह, गोपाल फिर से चिकन शेड में गया। उसने देखा कि सोना ने फिर एक सुनहरा अंडा दिया था! गोपाल हैरान रह गया। क्या यह रोज का चमत्कार होगा?

एक सप्ताह तक लगातार सोना ने रोज एक सुनहरा अंडा दिया। गोपाल के पास अब तीन लाख पचास हज़ार रुपये हो गए थे। उसने न केवल अपने सारे कर्ज चुका दिए, बल्कि नया ट्रैक्टर भी खरीद लिया।

गाँव वालों को इस रहस्य के बारे में पता चला तो वे भी आश्चर्यचकित थे। कुछ लोग इसे भगवान का आशीर्वाद मानते थे, तो कुछ कोई चमत्कार। गोपाल ने सोना को किसी को नहीं दिखाया और उसकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा।

जीवन में बदलाव

एक महीने में गोपाल का जीवन पूरी तरह बदल गया। उसने नया घर बनवाया, बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया और खेत के लिए आधुनिक उपकरण खरीदे। सीता ने भी नए कपड़े पहने और घर में नए बर्तन आए।

लेकिन गोपाल अभी भी वही साधारण किसान बना रहा। वह रोज सुबह चार बजे उठता, खेत पर काम करता और सोना की विशेष देखभाल करता। उसने सोना के लिए अलग से एक आलीशान शेड बनवाया, जहाँ उसे सबसे अच्छा दाना और साफ पानी मिलता।

लालच का जन्म

सीता का बदलता स्वभाव

धीरे-धीरे सीता का स्वभाव बदलने लगा। पहले वह साधारण जीवन में संतुष्ट रहती थी, लेकिन अब वह और अधिक चाहने लगी। एक दिन उसने गोपाल से कहा, “स्वामी, हमारे पास इतने पैसे हैं, फिर भी तुम रोज मेहनत क्यों करते हो? हम नौकर रख लें।”

गोपाल ने कहा, “प्रिय, मेहनत करना बुरी बात नहीं है। और सोना रोज केवल एक अंडा देती है, हमें इसी में संतुष्ट रहना चाहिए।”

लेकिन सीता संतुष्ट नहीं थी। उसने सोचा, “अगर सोना रोज एक अंडा देती है, तो उसके पेट में कितने सुनहरे अंडे होंगे? अगर हम उसे काटकर सारे अंडे एक साथ निकाल लें, तो हम एक ही दिन में करोड़पति बन जाएंगे!”

गोपाल का मन डगमगाना

सीता ने गोपाल को अपना विचार बताया। पहले तो गोपाल ने सख्ती से मना कर दिया। “यह तो पाप होगा! सोना हमारी किस्मत बदलने वाली है, हम उसे कैसे मार सकते हैं?”

लेकिन सीता ने हर रोज उस पर दबाव डालना शुरू कर दिया। “तुम सोचो, एक ही दिन में सारे अंडे मिल जाएंगे! हम शहर में बड़ा मकान खरीद सकते हैं, कार ले सकते हैं। बच्चों को विदेश पढ़ने भेज सकते हैं।”

धीरे-धीरे गोपाल के मन में भी लालच ने जगह बना ली। वह सोचने लगा, “क्या पता सीता सही कह रही हो? अगर हमें एक ही दिन में सारे अंडे मिल जाएँ, तो फिर कभी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।”

भयंकर गलती

अंधी लालच में अंधे होना

एक महीने तक सीता के समझाने के बाद, गोपाल ने हार मान ली। उसने सोचा, “आखिरकार सोना तो बस एक मुर्गी है। उसके मरने से हमें और अधिक फायदा होगा।”

एक रविवार की सुबह, जब बच्चे अपनी नानी के घर गए हुए थे, गोपाल ने सोना को पकड़ा। सीता ने चाकू तेज किया। सोना ने कुछ अजीब सी आवाजें निकालीं, मानो वह अपने भाग्य को समझ गई हो।

गोपाल के हाथ काँप रहे थे। “शायद हमें यह नहीं करना चाहिए,” उसने कहा।

लेकिन सीता ने कहा, “अब पीछे मत हटो। याद रखो, एक ही दिन में करोड़पति बन जाएंगे।”

गोपाल ने आँखें बंद कीं और चाकू चलाया।

कड़वी सच्चाई

जब उन्होंने सोना का पेट चीरा, तो उनकी सारी उम्मीदें धराशायी हो गईं। मुर्गी के पेट में कोई सुनहरा अंडा नहीं था, न ही कोई विशेष अंग। वह एकदम साधारण मुर्गी थी, जिसके अंदर साधारण अंडे बनने की प्रक्रिया चल रही थी।

सीता चीखी, “नहीं! यह कैसे हो सकता है? वह रोज सुनहरा अंडा देती थी!”

गोपाल ने निराश होकर कहा, “हमने बहुत बड़ी गलती की सीता। सोना साधारण मुर्गी थी, लेकिन उसमें असाधारण क्षमता थी। हमने लालच में आकर उसी क्षमता को नष्ट कर दिया।”

पछतावे की घड़ी

सब कुछ खोना

उस दिन के बाद गोपाल और सीता का जीवन फिर से पहले जैसा हो गया। सुनहरे अंडे आने बंद हो गए थे। उन्होंने जो पैसे जमा किए थे, वह धीरे-धीरे खर्च होने लगे।

नया घर, ट्रैक्टर और अन्य सामान के रखरखाव के लिए पैसों की जरूरत थी। बच्चों के स्कूल की फीस, कपड़े, खाने-पीने का खर्च – सब कुछ बढ़ गया था।

एक साल बाद, गोपाल के पास फिर से कुछ नहीं बचा था। उसे अपना ट्रैक्टर बेचना पड़ा। फिर नए घर की किस्तें भरने के लिए उसे अपनी जमीन का एक हिस्सा भी बेचना पड़ा।

गाँव वालों की प्रतिक्रिया

गाँव वालों को जब पता चला कि गोपाल ने सुनहरी मुर्गी को मार दिया है, तो वे हैरान रह गए। कुछ ने उसकी मूर्खता पर हँसा, तो कुछ ने दया दिखाई।

बुजुर्ग रामस्वरूप ने गोपाल से कहा, “बेटा, लालच बुरी बला है। तुम्हें जो मिला था, उसी में संतुष्ट रहना चाहिए था। भगवान ने तुम्हें एक विशेष उपहार दिया था, लेकिन तुमने लालच में आकर उसे नष्ट कर दिया।”

गोपाल ने सिर झुकाकर कहा, “आप सही कहते हैं चाचा। मैंने बहुत बड़ी गलती की।”

कठिन समय और सीख

नई शुरुआत

गोपाल ने फिर से पुराने तरीके से काम करना शुरू किया। वह सुबह चार बजे उठता, खेत पर काम करता और शाम को थककर लौटता। सीता भी अब पहले जैसी हो गई थी। वह फिर से साधारण जीवन जीने लगी।

एक दिन रामू ने पूछा, “पापा, वह सुनहरी मुर्गी कहाँ गई? क्या उसने फिर से सुनहरा अंडा देना बंद कर दिया?”

गोपाल ने सच्चाई बताने का निर्णय लिया। उसने बच्चों को अपने पास बिठाया और पूरी कहानी सुनाई।

“बच्चों,” गोपाल ने कहा, “मैंने और तुम्हारी माँ ने एक बहुत बड़ी गलती की। हमें एक विशेष उपहार मिला था, लेकिन हम लालच में आ गए। हमने यह सोचा कि अगर हमें एक साथ सब कुछ मिल जाए, तो बेहतर होगा। लेकिन हमने जो कुछ भी हासिल किया था, वह सब खो दिया।”

जीवन का पाठ

रामू ने पूछा, “पापा, इससे हमें क्या सीख मिलती है?”

गोपाल ने समझाया, “पहली सीख: लालच बुरी बला है। दूसरी: जो कुछ भी तुम्हें मिला है, उसकी कद्र करो। तीसरी: धीरे-धीरे मिलने वाली संपत्ति टिकाऊ होती है। चौथी: अधीरता और लालच तुम्हें सब कुछ खोने पर मजबूर कर सकते हैं।”

सीता ने आँसू पोंछते हुए कहा, “हमें संतोष से रहना चाहिए था। रोज एक सुनहरा अंडा भी बहुत था। उससे हमारा जीवन सुखमय था। लेकिन हम और अधिक चाहने लगे और सब कुछ खो बैठे।”

पुनर्निर्माण

कड़ी मेहनत से वापसी

गोपाल ने फिर से मेहनत करना शुरू किया। इस बार उसने अपने खेत में नई तकनीकों का इस्तेमाल किया। उसने जैविक खेती शुरू की और उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियाँ उगानी शुरू कीं।

धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाने लगी। उसकी सब्जियाँ शहर के बाजार में अच्छे दामों पर बिकने लगीं। दो साल के अंदर ही उसने अपनी खोई हुई जमीन का कुछ हिस्सा वापस खरीद लिया।

सीता ने भी मदद करनी शुरू की। उसने गाँव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर एक छोटा सा सिलाई का केंद्र शुरू किया। वहाँ वे कपड़े सिलती थीं और गाँव वालों को सिलाई सिखाती थीं।

बच्चों की समझदारी

रामू और सीता ने भी अपने माता-पिता की मदद करनी शुरू की। स्कूल के बाद वे खेत पर काम करते, सब्जियों की छँटाई करते और उन्हें पैक करते।

एक दिन सीता (बेटी) ने कहा, “पापा, हमारे पास अब तीन मुर्गियाँ हैं। क्या उनमें से कोई सुनहरा अंडा देगी?”

गोपाल मुस्कुराया, “नहीं बेटी, सुनहरा अंडा तो अब कभी नहीं मिलेगा। लेकिन इन मुर्गियों के साधारण अंडे भी कीमती हैं। इनसे हमें रोज प्रोटीन मिलता है और कभी-कभी हम अतिरिक्त अंडे बेचकर पैसे भी कमा लेते हैं।”

गाँव के लिए प्रेरणा

गोपाल की कहानी का प्रसार

गोपाल की कहानी पूरे गाँव में फैल गई। लोग उसकी गलती से सीख लेते और अपने बच्चों को यह कहानी सुनाते।

गाँव के स्कूल में शिक्षक ने गोपाल को बुलाया ताकि वह बच्चों को अपनी कहानी सुनाए। गोपाल ने सारी कहानी सुनाई – कैसे उसे सुनहरी मुर्गी मिली, कैसे उसका जीवन बदला, और कैसे लालच में आकर उसने सब कुछ खो दिया।

गोपाल ने कहा, “बच्चों, इस कहानी से तीन महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं:

  1. लालच कभी न करो
  2. जो कुछ भी तुम्हें मिला है, उसकी कद्र करो
  3. धैर्य से काम लो, तुरंत फल की इच्छा न रखो”

नैतिक शिक्षा का प्रसार

गाँव के सरपंच ने गोपाल की कहानी को गाँव के इतिहास का हिस्सा बना दिया। हर साल गाँव में होने वाले उत्सव में यह कहानी सुनाई जाने लगी।

गोपाल ने खुद भी अपने अनुभव से सीखा कि असली धन मेहनत, ईमानदारी और संतोष में है। उसने कभी भी फिर से जल्दी अमीर बनने के सपने नहीं देखे।

संतोष और सुख

पाँच साल बाद, गोपाल का परिवार फिर से सुखी था। हाँ, वे करोड़पति नहीं थे, लेकिन उनके पास खाने के लिए पर्याप्त था, रहने के लिए छत थी और पहनने के लिए कपड़े थे।

गोपाल ने अपने खेत को एक मॉडल फार्म में बदल दिया था। वह जैविक सब्जियाँ उगाता था जो शहर के बाजार में अच्छी कीमत पर बिकती थीं। सीता का सिलाई केंद्र भी अच्छा चल रहा था।

एक शाम, गोपाल और सीता अपने घर के बरामदे में बैठे थे। सीता ने कहा, “स्वामी, कभी-कभी मुझे उस सुनहरी मुर्गी की याद आती है।”

गोपाल ने कहा, “मुझे भी प्रिय। लेकिन अब मुझे एहसास है कि उस मुर्गी ने हमें सबसे बड़ी शिक्षा दी। अगर वह न होती, तो शायद हम आज भी लालच के जाल में फँसे होते।”

शाश्वत सीख

गोपाल ने अपने जीवन के अनुभव को एक सूत्र में बाँधा: “संतोष सबसे बड़ा धन है। मेहनत सबसे बड़ी पूँजी है। और लालच सबसे बड़ा शत्रु है।”

उसने अपने बच्चों को यह सीख दी और गाँव के युवाओं को भी समझाया। गोपाल की कहानी अब केवल एक चेतावनी भरी कहानी नहीं रही, बल्कि एक प्रेरणा बन गई – प्रेरणा साधारण जीवन जीने की, मेहनत करने की और संतोष से रहने की।

निष्कर्ष

सुनहरा अंडा देने वाली मुर्गी की यह कहानी एक शाश्वत नैतिक शिक्षा देती है जो हर युग, हर समाज के लिए प्रासंगिक है।

मुख्य शिक्षाएँ:

  1. लालच का परिणाम हमेशा बुरा होता है – गोपाल और सीता की तरह जो लोग लालच में पड़ते हैं, वे अक्सर वह भी खो देते हैं जो उनके पास है।
  2. धैर्य और संतोष महत्वपूर्ण हैं – रोज एक सुनहरा अंडा मिलना भी बहुत था, लेकिन लालच ने उन्हें अधीर बना दिया।
  3. प्रकृति के नियमों के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए – सुनहरा अंडा देने वाली मुर्गी एक असाधारण घटना थी, लेकिन गोपाल ने उसे साधारण मुर्गी की तरह समझने की गलती की।
  4. मेहनत और ईमानदारी सबसे बड़ी पूँजी हैं – आखिरकार गोपाल ने अपनी मेहनत से ही अपना जीवन फिर से सुधारा।

यह कहानी हमें यह याद दिलाती है कि जीवन में त्वरित सफलता और त्वरित धन के लालच में हम अक्सर वह खो देते हैं जो हमारे पास पहले से है। स्थिर, निरंतर और ईमानदार प्रयास ही सच्ची सफलता की कुंजी है। संतोष और धैर्य ऐसे गुण हैं जो हमें न केवल धनवान बनाते हैं, बल्कि सच्चे सुख की ओर भी ले जाते हैं।

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