एक तारा टूट गया है

छोटी सी आँखें खुलीं। रोशनी ने उन्हें चुभन सी दी। वो धीरे से उठ बैठा। कमरा खाली था। खिड़की से सूरज की किरणें आ रही थीं। उसने देखा, मेज पर एक चिट पड़ी थी।

“आरव, हम दोनों अस्पताल गए हैं। तुम स्कूल जाना। दोपहर को दादी आएंगी। खाना फ्रिज में है।”

आरव ने चिट को देखा। मम्मी-पापा फिर अस्पताल गए। पिछले छह महीने से वे अक्सर अस्पताल जाते थे। आरव समझता था कि उसकी छोटी बहन आराध्या बीमार है। पर कोई बताता नहीं था कि वो क्यों बीमार है।

आरव ने स्कूल की यूनिफॉर्म पहनी। वो दूसरी क्लास में पढ़ता था। उसका स्कूल घर से पास ही था। वो अकेले ही स्कूल जाता था।

स्कूल में आज फिर वही सवाल। रोहन ने पूछा, “आरव, तुम्हारी बहन अभी तक ठीक नहीं हुई?”

आरव ने सिर हिलाया, “नहीं। वो अस्पताल में है।”

शिक्षिका मिस प्रियंका क्लास में आईं। उन्होंने सब बच्चों को देखा। “आज हम तारों के बारे में पढ़ेंगे,” उन्होंने कहा।

आरव ने ध्यान से सुना। मिस प्रियंका ने बताया, “आकाश में लाखों तारे होते हैं। हर तारा एक सूरज की तरह होता है। कुछ तारे टूट जाते हैं। उन्हें टूटता तारा कहते हैं। जब कोई तारा टूटता है, तो लोग मन्नत मांगते हैं।”

आरव ने सोचा, ‘क्या मैं मन्नत मांग सकता हूँ? क्या मेरी मन्नत से आराध्या ठीक हो जाएगी?’

दोपहर को घर लौटते हुए आरव ने आकाश की ओर देखा। दिन में तारे दिखाई नहीं देते थे। वो सोचने लगा, ‘रात को मैं तारा देखूंगा और मन्नत मांगूंगा।’

घर पहुँचा तो दादी माँ आ चुकी थीं। दादी माँ का चेहरा उदास था। आरव ने पूछा, “दादी, आराध्या कब ठीक होगी?”

दादी ने आरव को गले लगा लिया। “जल्दी ठीक हो जाएगी बेटा। तुम खाना खाओ।”

पर आरव को लग रहा था कि दादी कुछ छुपा रही हैं।

दूसरा भाग

शाम को मम्मी-पापा लौटे। उनकी आँखें लाल थीं। पापा ने आरव को पास बुलाया। “बेटा, हमें तुमसे कुछ बात करनी है।”

आरव का दिल धड़कने लगा। मम्मी ने कहा, “आराध्या बहुत बीमार है। डॉक्टर कहते हैं… उसे बचाना मुश्किल है।”

आरव ने समझने की कोशिश की। “मतलब? वो ठीक नहीं होगी?”

पापा की आवाज़ काँप रही थी। “हम कोशिश कर रहे हैं बेटा। पर… पर तैयार रहना चाहिए।”

आरव ने पूछा, “तैयार क्यों रहना? वो तो ठीक हो जाएगी न?”

मम्मी रोने लगीं। आरव समझ गया कि कुछ गलत है। वो भागकर अपने कमरे में चला गया। वो समझ नहीं पा रहा था कि क्या हो रहा है।

रात को आरव ने खिड़की से आकाश देखा। आज बादल थे। तारे दिख नहीं रहे थे। उसने मन ही मन कहा, ‘कल रात मैं जरूर तारा देखूंगा। और मन्नत मांगूंगा।’

अगले दिन स्कूल में आरव चुपचाप बैठा रहा। मिस प्रियंका ने देखा कि आरव उदास है। क्लास के बाद उन्होंने आरव को अपने पास बुलाया।

“क्या बात है आरव? तुम आज चुप क्यों हो?”

आरव ने सब कह सुनाया। मिस प्रियंका ने उसे समझाया, “कभी-कभी जीवन में ऐसा होता है। हमें मजबूत रहना चाहिए।”

आरव ने पूछा, “मैम, अगर मैं टूटता तारा देखकर मन्नत मांगूं, तो क्या मेरी बहन ठीक हो जाएगी?”

मिस प्रियंका ने आरव की आँखों में देखा। “मन्नतें अच्छी होती हैं आरव। पर कभी-कभी… कभी-कभी चीजें हमारे हाथ में नहीं होतीं।”

आरव ने ठान ली थी। वो टूटता तारा देखकर मन्नत मांगेगा।

तीसरा भाग

एक हफ्ते बीत गया। आराध्या की हालत बिगड़ती जा रही थी। डॉक्टरों ने कहा कि अब ज्यादा उम्मीद नहीं है। घर में सन्नाटा पसरा था।

आरव रोज रात को आकाश देखता। पर बादलों के कारण तारे दिख नहीं रहे थे। एक रात, आरव जाग रहा था। तभी उसने खिड़की से देखा। बादल हट गए थे। आकाश साफ था।

आरव ने आकाश को देखा। लाखों तारे चमक रहे थे। वो प्रार्थना करने लगा, ‘कृपया कोई तारा टूटे। मैं मन्नत मांगना चाहता हूँ।’

कई मिनट बीत गए। कोई तारा नहीं टूटा। आरव ने आँखें बंद कीं। उसने सोचा, ‘शायद मैं देख नहीं पाया।’

तभी एक चमकती रेखा आकाश में दिखाई दी। एक तारा टूटा! वो जल्दी से आकाश की ओर देखने लगा। पर तारा गायब हो गया था।

आरव ने जल्दी से मन्नत मांगी, ‘कृपया मेरी बहन आराध्या ठीक हो जाए।’

उस रात आरव को नींद अच्छी आई। उसे लगा कि उसकी मन्नत जरूर पूरी होगी।

अगली सुबह आरव उठा तो घर में रोने की आवाज़ आ रही थी। वो दौड़कर बाहर गया। मम्मी-पापा और दादी सब रो रहे थे।

पापा ने आरव को गले लगा लिया। “बेटा… आराध्या चली गई।”

आरव ने समझा नहीं। “कहाँ गई? अस्पताल से घर आ रही है?”

मम्मी ने कहा, “नहीं बेटा… वो… वो इस दुनिया में नहीं रही।”

आरव के पैरों तले जमीन खिसक गई। वो समझ गया। उसकी बहन मर गई थी। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

“पर मैंने तो मन्नत मांगी थी!” आरव चिल्लाया। “मैंने टूटता तारा देखकर मन्नत मांगी थी! वो ठीक क्यों नहीं हुई?”

कोई जवाब नहीं था। सब चुपचाप रो रहे थे।

चौथा भाग

कई दिन बीत गए। आरव स्कूल नहीं जा रहा था। वो अपने कमरे में बैठा रहता। उसे किसी से बात करने का मन नहीं करता था।

एक दिन मिस प्रियंका घर आईं। उन्होंने आरव से बात करने की कोशिश की।

“आरव, मैं समझती हूँ तुम दुखी हो।”

आरव ने कहा, “मैम, मैंने टूटता तारा देखकर मन्नत मांगी थी। फिर मेरी बहन ठीक क्यों नहीं हुई?”

मिस प्रियंका ने आरव के पास बैठकर कहा, “आरव, कभी-कभी हमारी मन्नतें इस तरह पूरी नहीं होतीं जैसा हम सोचते हैं। पर इसका मतलब यह नहीं कि तुम्हारी मन्नत व्यर्थ गई।”

“पर वो तो मर गई,” आरव रोने लगा।

मिस प्रियंका ने उसे गले लगा लिया। “तुम्हारी बहन अब एक तारे की तरह है। वो आकाश में चमक रही है। जब भी तुम तारे देखोगे, तुम्हें उसकी याद आएगी।”

आरव ने सोचा, ‘शायद मैम सही कह रही हैं।’

उस रात आरव ने फिर आकाश देखा। उसने एक चमकता तारा देखा। उसे लगा वो उसकी बहन है। उसने मुस्कुराने की कोशिश की।

पाँचवाँ भाग

कुछ दिन बाद आरव स्कूल लौटा। वो अब भी उदास था पर रोज स्कूल जाने लगा।

एक दिन मिस प्रियंका ने क्लास में कहा, “बच्चों, आज हम एक प्रोजेक्ट बनाएंगे। हम सब मिलकर आकाश बनाएंगे। हर बच्चा एक तारा बनाएगा।”

सब बच्चे खुश हो गए। आरव ने भी एक तारा बनाया। उसने उस पर आराध्या लिखा।

मिस प्रियंका ने देखा तो पूछा, “आरव, यह क्या?”

आरव ने कहा, “यह मेरी बहन का तारा है। वो अब आकाश में है।”

मिस प्रियंका मुस्कुराईं। “बहुत अच्छा आरव।”

शाम को आरव घर लौटा तो उसने मम्मी-पापा को बताया, “आज मैंने आराध्या का तारा बनाया।”

मम्मी की आँखों में आँसू आ गए। पापा ने आरव को गले लगा लिया। “तुम हमारे बहादुर बेटे हो।”

आरव ने कहा, “मैम ने कहा, आराध्या अब तारे की तरह चमक रही है। हम जब भी तारे देखेंगे, उसे याद करेंगे।”

मम्मी ने कहा, “हाँ बेटा। तुम सही कह रहे हो।”

छठा भाग

कुछ महीने बीत गए। आरव धीरे-धीरे सामान्य हो रहा था। वो अब भी रोज रात को आकाश देखता। उसे एक तारा सबसे ज्यादा चमकता दिखता।

एक रात पापा उसके पास आए। “क्या देख रहे हो आरव?”

“वो तारा देख रहा हूँ पापा। मुझे लगता है वो आराध्या है।”

पापा ने आरव के कंधे पर हाथ रखा। “तुम्हारी बहन तुमसे बहुत प्यार करती थी।”

“मुझे याद है पापा,” आरव ने कहा। “वो मेरे साथ खेलती थी। मैं उसे कहानियाँ सुनाता था।”

पापा बोले, “तुम जानते हो, तारे कभी नहीं मरते। वो बस दूर चले जाते हैं। उनकी रोशनी हम तक पहुँचती है। तुम्हारी बहन भी हमेशा तुम्हारे साथ है।”

आरव ने पापा को गले लगा लिया। “मैं उसे कभी नहीं भूलूंगा।”

“नहीं भूलना चाहिए बेटा। यादें ही हैं जो लोगों को जिंदा रखती हैं।”

सातवाँ भाग

आरव ने अपने दोस्तों को बताया कि उसकी बहन अब एक तारा है। सब बच्चे उसकी बात सुनते। कुछ बच्चे उसका मजाक उड़ाते। पर आरव को इससे फर्क नहीं पड़ता था।

एक दिन स्कूल में एक नया बच्चा आया। उसका नाम विहान था। विहान भी उदास रहता था। आरव ने पूछा, “तुम उदास क्यों हो?”

विहान ने बताया, “मेरा कुत्ता मर गया। वो मेरा सबसे अच्छा दोस्त था।”

आरव ने कहा, “मेरी बहन भी मर गई है। पर मैम ने कहा, वो अब तारे की तरह है। तुम भी सोचो, तुम्हारा कुत्ता अब तारा बन गया है।”

विहान ने आश्चर्य से देखा। “सचमुच?”

“हाँ। जब भी तुम तारे देखोगे, तुम्हें अपने कुत्ते की याद आएगी।”

विहान मुस्कुराया। “तुम्हारी बात सही है।”

दोनों दोस्त बन गए। आरव ने महसूस किया कि दुख बाँटने से कम हो जाता है।

आठवाँ भाग

आरव के जन्मदिन पर मम्मी-पापा ने उसे एक तोहफा दिया। एक टेलीस्कोप। आरव बहुत खुश हुआ।

“अब मैं तारों को करीब से देख सकता हूँ!” उसने खुशी से कहा।

पापा ने कहा, “हाँ बेटा। तुम रोज रात को तारे देख सकते हो।”

आरव ने पहली रात ही टेलीस्कोप से आकाश देखा। तारे और भी सुंदर दिख रहे थे। उसे एक खास तारा दिखा जो बहुत चमक रहा था।

“मम्मी, देखो! यह तारा सबसे ज्यादा चमक रहा है। मुझे लगता है यह आराध्या है।”

मम्मी ने भी देखा। उनकी आँखों में आँसू आ गए। “हाँ बेटा। बिल्कुल सही। यही वो तारा है।”

आरव ने कहा, “अब मैं हर रात उसे देखूंगा। और उससे बात करूंगा।”

मम्मी ने आरव को गले लगा लिया। “तुम बहुत अच्छे बच्चे हो।”

नौवाँ भाग

स्कूल में मिस प्रियंका ने एक प्रतियोगिता रखी। “बच्चों, हमें एक कहानी लिखनी है। सबसे अच्छी कहानी को इनाम मिलेगा।”

आरव ने सोचा कि वो क्या लिखे। उसे एक विचार आया। उसने लिखना शुरू किया।

कहानी का नाम था – “मेरी बहन, एक तारा”

आरव ने लिखा कि कैसे उसकी बहन बीमार हुई। कैसे उसने टूटता तारा देखकर मन्नत मांगी। कैसे उसकी बहन मर गई। और कैसे वो अब एक तारा बन गई।

उसने लिखा, “कभी-कभी हमारी मन्नतें वैसे पूरी नहीं होतीं जैसा हम चाहते हैं। पर इसका मतलब यह नहीं कि हम मन्नत मांगना बंद कर दें। हमें हमेशा आशा रखनी चाहिए। मेरी बहन शारीरिक रूप से मेरे साथ नहीं है, पर वो हमेशा मेरे दिल में रहेगी। जब भी मैं तारे देखूंगा, मुझे उसकी याद आएगी।”

कहानी पूरी करके आरव ने मिस प्रियंका को दी।

दसवाँ भाग

एक हफ्ते बाद मिस प्रियंका ने रिजल्ट बताया। “बच्चों, सबने बहुत अच्छी कहानियाँ लिखी हैं। पर एक कहानी सबसे खास है।”

सब बच्चे उत्सुकता से देखने लगे।

“आरव की कहानी जीती है,” मिस प्रियंका ने कहा।

आरव हैरान रह गया। सब बच्चे तालियाँ बजाने लगे।

मिस प्रियंका ने आगे कहा, “आरव ने एक दुखद घटना से सीख ली है। उसने हमें बताया है कि जब हमारे प्रियजन हमें छोड़कर चले जाते हैं, तो वो हमेशा के लिए नहीं जाते। वो हमारी यादों में जिंदा रहते हैं।”

आरव की आँखों में आँसू आ गए। मिस प्रियंका ने उसे इनाम दिया – एक बड़ी किताब जिसमें तारों की तस्वीरें थीं।

शाम को आरव ने मम्मी-पापा को किताब दिखाई। “मेरी कहानी जीती है!”

मम्मी-पापा बहुत खुश हुए। “हमें तुम पर गर्व है बेटा।”

आरव ने कहा, “मैं बड़ा होकर खगोलशास्त्री बनूंगा। मैं तारों के बारे में और जानूंगा।”

पापा ने कहा, “तुम जरूर बनोगे। और तुम्हारी बहन तुम्हें आकाश से देख रही होगी।”

अंतिम भाग

कई साल बीत गए। आरव बड़ा हो गया। वो सचमुच खगोलशास्त्री बना। उसने तारों के बारे में बहुत कुछ सीखा।

एक दिन आरव एक स्कूल में बच्चों को पढ़ा रहा था। उसने बच्चों को तारों के बारे में बताया।

एक बच्चे ने पूछा, “सर, क्या टूटता तारा देखकर मन्नत मांगने से मन्नत पूरी होती है?”

आरव मुस्कुराया। उसने अपनी कहानी सुनाई। “मैंने भी एक बार टूटता तारा देखकर मन्नत मांगी थी। मेरी बहन बीमार थी। मैं चाहता था वो ठीक हो जाए। पर वो ठीक नहीं हुई।”

बच्चे ने पूछा, “तो मन्नत मांगना व्यर्थ है?”

“नहीं,” आरव ने कहा। “मन्नत मांगने से हमारी आशा बनी रहती है। और कभी-कभी मन्नतें अलग तरह से पूरी होती हैं। मेरी बहन शारीरिक रूप से नहीं रही, पर वो मेरे दिल में हमेशा जिंदा है। और आज मैं तारों के बारे में पढ़ाता हूँ। शायद यही उसकी मन्नत थी।”

बच्चे समझ गए। आरव ने आगे कहा, “जब भी तुम तारे देखो, याद रखना। हर तारे की एक कहानी है। और हर इंसान की भी। हम सब इस ब्रह्मांड का हिस्सा हैं।”

शाम को आरव ने अपने टेलीस्कोप से आकाश देखा। उसने वही चमकता तारा देखा जो उसे बचपन से दिखता था।

“तुम देख रही हो न आराध्या?” उसने मुस्कुराते हुए कहा। “मैंने आज फिर बच्चों को तुम्हारी कहानी सुनाई।”

तारा चमकता रहा, जैसे कह रहा हो – ‘हाँ भैया, मैं देख रही हूँ। मुझे तुम पर गर्व है।’

आरव ने महसूस किया कि जिन्हें हम प्यार करते हैं, वो कभी नहीं मरते। वो हमारी यादों में, हमारे दिल में हमेशा जिंदा रहते हैं। और कभी-कभी वो तारों की तरह आकाश में चमकने लगते हैं, हमें रोशनी दिखाते हैं, हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

एक तारा टूट गया था, पर उसकी रोशनी ने एक नया रास्ता दिखाया। दुख ने आरव को मजबूत बनाया। और प्यार ने उसे बताया कि अलविदा कभी अंत नहीं होता, बस एक नई शुरुआत होती है।

समाप्त

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