दरवाज़े से दूर, आसमान तक: राहुल की अनोखी यात्रा
अंधेरी कोठरी से पहली किरण तक दिल्ली के उन तंग गलियों में, जहाँ सूरज की रोशनी भी घुसने से कतराती थी, एक छोटी सी कोठरी में राहुल अपनी माँ के साथ रहता था। उसकी दुनिया महज दस फुट बाई दस फुट थी, जिसमें एक चारपाई, एक छोटा सा चूल्हा और किताबों का एक ढेर था। …