दरवाज़े से दूर, आसमान तक: राहुल की अनोखी यात्रा

दरवाज़े से दूर, आसमान तक: राहुल की अनोखी यात्रा

अंधेरी कोठरी से पहली किरण तक दिल्ली के उन तंग गलियों में, जहाँ सूरज की रोशनी भी घुसने से कतराती थी, एक छोटी सी कोठरी में राहुल अपनी माँ के साथ रहता था। उसकी दुनिया महज दस फुट बाई दस फुट थी, जिसमें एक चारपाई, एक छोटा सा चूल्हा और किताबों का एक ढेर था। …

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धुन कजरी की, कहानी प्यार की

धुन कजरी की

धुन कजरी की, कहानी प्यार की बनारस की गलियाँ सुबह से ही सरसरा रही थीं। नहीं, हवा नहीं, बातचीत से। “सुनते हो? अम्मा कह रही थीं, आज सावन की पहली सोमवारी है। शहर के बाहर, पुराने पीपल के पेड़ के पास, कोई नया बैंड बजाएगा। कजरी। असली, देशी।” अनन्या के कानों तक यह बात पहुँची …

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पीपल के नीचे पंचायत

पीपल के नीचे पंचायत

गाँव की वो पुरानी पीपल, जिसकी जड़ें धरती के नीचे कितना फैल चुकी थीं, कोई नहीं जानता था। लेकिन उसकी शाखाएं जितनी ऊपर फैली थीं, उतनी ही इस गाँव के इतिहास में भी थीं। बसंती देवी इस पेड़ के नीचे पचास साल से पंचायत लेती आई थीं। आज उनकी आखिरी पंचायत थी। “बसंती काकी, आप …

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गाँव का मास्टर जी: स्याही और संस्कारों की दुनिया

गाँव का मास्टर जी

उस सुबह जब पहली किरण अभी पीपल के पत्तों को छू भी नहीं पाई थी, मास्टर जी पहले ही विद्यालय पहुँच चुके थे। उनका विद्यालय कोई भव्य इमारत नहीं था – चार कच्ची दीवारें, खपरैल की छत और फर्श पर बिछी चटाइयाँ। लेकिन मास्टर जी के लिए यह ताजमहल से कम नहीं था। मास्टर जी …

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पिता की चुपचाप कुर्बानियाँ: एक अनकही दास्तां

पिता की चुपचाप कुर्बानियाँ: एक अनकही दास्तां

वह सुबह जब सब कुछ बदल गया राहुल को याद था वह सुबह – 15 जून, 2005। वह दसवीं कक्षा में था और उस दिन उसकी गणित की परीक्षा थी। सुबह पाँच बजे, जब वह पढ़ाई कर रहा था, उसने देखा कि उसके पिता, श्री महेश शर्मा, चुपचाप तैयार हो रहे हैं। उनकी आँखों में …

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हल चलाता किसान: मिट्टी और पसीने की कहानी

हल चलाता किसान: मिट्टी और पसीने की कहानी

रामसिंह सुबह चार बजे ही उठ गया। पूर्वी आकाश में अभी तारे झिलमिला रहे थे और ठंडी हवा में खेतों से आती नमी की गंध उसके नथुनों में समा रही थी। उसने चूल्हे पर बची हुई रात की चाय गर्म की और एक घूँट लेकर अपने खेतों की ओर देखा। पांच एकड़ ज़मीन – न …

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लॉकडाउन की सच्ची कहानी: अनचाहे विराम से नई शुरुआत

लॉकडाउन की सच्ची कहानी

24 मार्च 2020 की वह रात, जब प्रधानमंत्री के भाषण के साथ ही पूरा देश थम सा गया। 21 दिन के लॉकडाउन ने हर जीवन को एक अनचाहा विराम दे दिया। राजेश, जो एक छोटे रेस्तरां में मैनेजर थे, के लिए लॉकडाउन का मतलब था नौकरी जाने का डर। घर बैठे-बैठे वे रोज़ अपने मालिक …

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गांव की बिजली: स्वावलंबन की एक चिंगारी

गांव की बिजली: स्वावलंबन की एक चिंगारी

एक समय की बात है जब एक गाँव ने सरकारी योजनाओं का इंतज़ार छोड़ अपनी बिजली खुद बनाने का फैसला किया। यह कहानी है सामुदायिक एकजुटता, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की। अँधेरे में डूबा गाँव और एक अधूरा सपना सिमराहा गाँव की शामें सूरज ढलते ही शुरू हो जाती थीं। जैसे ही सूर्य की अंतिम किरणें …

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असफलता से सीखकर सफलता तक: रोहित की कहानी

असफलता से सीखकर सफलता तक: रोहित की कहानी

असफलता से सीखकर सफलता तक: रोहित की कहानी रोहित मध्यमवर्गीय परिवार से था। उसके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और माँ गृहणी। पूरे परिवार का सपना था कि रोहित इंजीनियर बने। बारहवीं कक्षा में 95% अंक लाने के बाद, रोहित ने IIT की तैयारी शुरू की। एक साल तक दिन-रात मेहनत की, कोचिंग ज्वाइन …

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ईमानदार लकड़हारा: एक समृद्ध कहानी

ईमानदार लकड़हारा

गाँव की शुरुआत सुबह के पहले किरणों के साथ ही रामू कुल्हाड़ी उठाकर जंगल की ओर चल पड़ा। वह सुंदरपुर गाँव का एक साधारण लकड़हारा था, जिसकी ईमानदारी के चर्चे पूरे इलाके में थे। रामू की उम्र चालीस वर्ष थी, लेकिन जीवन की मेहनत ने उसके चेहरे पर समय से पहले ही झुर्रियां डाल दी …

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