जादुई खेल – कल्पना की दुनिया

जादुई खेल - कल्पना की दुनिया

खोई हुई कल्पना राहुल सात साल का एक चतुर लड़का था, पर उसकी एक समस्या थी – वह खेलना भूल चुका था। उसका सारा समय टीवी, वीडियो गेम्स और मोबाइल फोन में बीतता था। एक दिन, जब उसकी दादी ने उसे अपने बचपन के खेलों के बारे में बताया, तो राहुल ने नाक-भौं सिकोड़ते हुए …

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खेत की मेड़: धरोहर और विवाद की कहानी

रामपुर गाँव के बीचों-बीच एक पुराना खेत था, जिसकी एक मेड़ ने दो परिवारों के बीच दशकों पुराने रिश्ते तार-तार कर दिए थे। यह कोई साधारण मेड़ नहीं थी – यह करीब दो फीट चौड़ी और लगभग सौ मीटर लंबी मिट्टी की दीवार थी, जिस पर बरसों से घास, छोटे-छोटे पौधे और एक पुराना बेर …

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कच्ची पगडंडी

कच्ची पगडंडी

कच्ची पगडंडी मेघा के लैपटॉप का स्क्रीनसेवर बार-बार बदल रहा था – हिमालय की तस्वीरें, जिन्हें उसने कभी खुद नहीं खींची थी। डेस्क पर रखा हर्बल टी का कप ठंडा पड़ चुका था। बारहवीं मंजिल से दिख रहा मुंबई का शहर अपनी निरंतर गतिशीलता में डूबा हुआ था, पर मेघा का मन कहीं और भटक …

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पीपल के नीचे पंचायत

पीपल के नीचे पंचायत

गाँव की वो पुरानी पीपल, जिसकी जड़ें धरती के नीचे कितना फैल चुकी थीं, कोई नहीं जानता था। लेकिन उसकी शाखाएं जितनी ऊपर फैली थीं, उतनी ही इस गाँव के इतिहास में भी थीं। बसंती देवी इस पेड़ के नीचे पचास साल से पंचायत लेती आई थीं। आज उनकी आखिरी पंचायत थी। “बसंती काकी, आप …

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लोटा और लाज

लोटा और लाज

खोया हुआ लोटा बाबूजी का अनमोल लोटा रामस्वरूप दास के लिए उनका पीतल का लोटा कोई साधारण बर्तन नहीं था। वह उनकी पहचान थी, उनकी शान थी, उनके पिता की विरासत थी। पचास साल से भी ज्यादा समय से वह उसी लोटे से पानी पीते आ रहे थे। लोटे पर उनके दादा ने उनके नाम …

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पोखरे के किनारे

पोखरे के किनारे

गाँव का वो पुराना पोखरा गर्मियों की एक शाम थी। सूरज ढलने को था और आसमान में नारंगी और बैंगनी रंगों का मेल जैसे किसी चित्रकार की पैलेट पर बिखर गया हो। गाँव के पश्चिमी छोर पर स्थित पोखरे के किनारे बैठी मीनाक्षी की नजरें पानी की सतह पर तैरते कमल के पत्तों पर टिकी …

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लॉकडाउन की सच्ची कहानी: अनचाहे विराम से नई शुरुआत

लॉकडाउन की सच्ची कहानी

24 मार्च 2020 की वह रात, जब प्रधानमंत्री के भाषण के साथ ही पूरा देश थम सा गया। 21 दिन के लॉकडाउन ने हर जीवन को एक अनचाहा विराम दे दिया। राजेश, जो एक छोटे रेस्तरां में मैनेजर थे, के लिए लॉकडाउन का मतलब था नौकरी जाने का डर। घर बैठे-बैठे वे रोज़ अपने मालिक …

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गुड़ की मिठास

गुड़ की मिठास

गुड़ की मिठास कंप्यूटर स्क्रीन की नीली रोशनी में डूबा प्रतीक, लंदन के अपने ऑफिस की बत्तीसवीं मंजिल से शहर की झिलमिलाती लाइटों को देख रहा था। बाहर कोहरा था, और भीगी सड़कों पर चलते लोग काले कोटों में छिपे हुए से लग रहे थे। उसने अपनी कॉफ़ी का आखिरी घूँट पिया – एक डबल …

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अकेलेपन की कहानी अनकहा सन्नाटा

अकेलेपन की कहानी अनकहा सन्नाटा

शहर के एक कोने में बसा वह पुराना मकान नंबर 47, जिसकी खिड़कियाँ सालों से बंद पड़ी थीं। उस मकान में अकेले रहते थे रमेश शर्मा, सत्तर साल के वो बुजुर्ग जिनके चेहरे पर मुस्कान तब आती थी जब वो पुराने एल्बम के पन्ने पलटते। रमेश जी का परिवार बड़ा था। पत्नी सरोज, दो बेटे …

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पिता की छाया

पिता की छाया

पहला अध्याय: वह बरगद का पेड़ गाँव की उस पुरानी कोठी के सामने एक विशाल बरगद का पेड़ था, जिसकी छाया में बैठकर पंडित जी दर्ज़ी की दुकान चलाते थे। रोहन के लिए वह पेड़ सिर्फ एक पेड़ नहीं था, वह उसका पूरा बचपन था। उसकी जड़ों में छुपकर खेलना, डालियों पर चढ़ना, और शाम …

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