गाँव की पहली साइकिल: पहियों पर सवार एक क्रांति

गाँव की पहली साइकिल

एक अनोखा आगमन सन् 1962 की बात है। हमारा गाँव ‘सुखपुरा’ दुनिया की भागदौड़ से कोसों दूर, शांति से सोया हुआ था। गाँव की धूलभरी सड़कों पर बैलगाड़ियों के पहियों के निशान और पैदल चलने वालों के पैरों के निशान ही देखने को मिलते थे। एक दिन सुबह-सुबह जब गाँव वाले अपने दैनिक कामों में …

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ज़िंदगी ने फिर मौका दिया

ज़िंदगी ने फिर मौका दिया

अमित का चेहरा सूरज की आखिरी किरणों में डूबे उस पीली-सुर्ख इमारत की तरफ था, लेकिन नज़रें कहीं और थीं। वह बार-बार अपनी कार की स्टीयरिंग पर बंधी सफेद पट्टी को टटोल रहा था, जिस पर “मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट – अपडेटेड” लिखा था। दो साल, छह महीने और सत्रह दिन। इतने समय के बाद वह …

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गरीब की अमीरी: एक ऐसा खजाना जो धन से परे था

गरीब की अमीरी: एक ऐसा खजाना जो धन से परे था

अंधेरी बस्ती का रौशन दिल रामू की झोपड़ी शहर के किनारे बसी उस झुग्गी बस्ती के सबसे निचले हिस्से में थी, जहाँ नालों का गंदा पानी बरसात के दिनों में घुस आता था। तीन बच्चे, बीमार पत्नी और बूढ़ी माँ की जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी। दिन भर मजदूरी करके वह जो कमाता, वह दवा …

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खेत की मेड़: धरोहर और विवाद की कहानी

रामपुर गाँव के बीचों-बीच एक पुराना खेत था, जिसकी एक मेड़ ने दो परिवारों के बीच दशकों पुराने रिश्ते तार-तार कर दिए थे। यह कोई साधारण मेड़ नहीं थी – यह करीब दो फीट चौड़ी और लगभग सौ मीटर लंबी मिट्टी की दीवार थी, जिस पर बरसों से घास, छोटे-छोटे पौधे और एक पुराना बेर …

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हार मानने से पहले की जीत: वह आखिरी प्रयास जिसने सब कुछ बदल दिया

हार मानने से पहले की जीत

अंतिम सांसें, अंतिम प्रयास वह रात जब सब कुछ समाप्त होता दिखा माधव की आँखें थकी हुई थीं। कमरे में घंटों से पड़े हुए कागजातों पर उसकी नजरें धुँधली पड़ रही थीं। डेस्क पर रखी घड़ी ने रात के 2 बजा दिए थे। कल सुबह 10 बजे उसके स्टार्टअप ‘इनोवेट एजु’ के लिए अंतिम फंडिंग …

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असफलता ने कैसे बदली किस्मत: एक ऐसी कहानी जो आपको नए नजरिए से देखना सिखाएगी

सुनहरे सपने और पहली नाकामयाबी राजेश की कहानी एक आम मध्यमवर्गीय परिवार से शुरू होती है। पिता बैंक क्लर्क, माँ गृहिणी। बचपन से ही राजेश बेहद मेधावी छात्र था। हर कक्षा में प्रथम आता, स्कूल के सभी ट्रॉफी उसके नाम। परिवार, शिक्षक, पड़ोसी – सभी की नजरें उस पर टिकी थीं। बारहवीं में 98% अंक …

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गरीबी से सफलता तक का सफर: एक व्यक्तिगत यात्रा

एक मिट्टी के घर में पहली सांस मेरा जन्म बिहार के एक छोटे से गाँव में हुआ था, जहाँ बिजली सपना थी और पक्की सड़क एक लक्जरी। हमारा घर मिट्टी का था, छप्पर की छत थी जिससे मानसून में पानी टपकता रहता था। पिता एक छोटे से खेत में मजदूरी करते थे, माँ घर संभालती …

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दुल्हन का गहना

शादी की तोहफा आयुषी की शादी की रात थी। समारोह खत्म हो चुका था, और अब वह अपने नए ससुराल के कमरे में बैठी थी। उसका पति, विराट, अभी तक कमरे में नहीं आया था। वह गेस्ट्स को विदा कर रहा था। तभी दरवाज़ा खुला और विराट की दादी अंदर आईं। उनके हाथ में एक …

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रिश्तों के भूत

Ghosts of Relationships: A Horror Story

वापसी अरुण बीस साल बाद अपने पैतृक गाँव लौटा था। उस पुराने हवेली के सामने खड़े होकर उसे अपना बचपन याद आ रहा था। लेकिन यह यादें मीठी नहीं थीं। हवेली का मुख्य दरवाज़ा जर्जर हो चुका था। अरुण ने चाबी घुमाई – वही पुरानी चाबी जो उसके पिता ने मरने से पहले दी थी। …

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अंतिम सांस तक ममता: एक माँ का अमर त्याग

अंतिम सांस तक ममता: एक माँ का अमर त्याग

बारिश की उस रात सन् 1995 की बात है। एक छोटे से गाँव में तेज़ बारिश हो रही थी। बिजली गिरने से पूरा गाँव अंधकार में डूबा हुआ था। ऐसे में एक छोटी सी झोपड़ी से एक स्त्री की कराह सुनाई दी। वह थीं सुशीला, जो अकेले ही प्रसव पीड़ा से जूझ रही थीं। उनके …

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